भास्कर न्यूज | अमृतसर विजिलेंस ने साल 2011-12 के दौरान असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती में धांधली के मामले में जीएनडीयू के पूर्व वीसी अजायब सिंह बराड़ तो जाली एलपीसी लगाकर पूर्व प्रिंसिपल जगजीत कौर द्वारा प्रोफेसर पद हासिल करने के मामले में केस दर्ज कर गिरफ्तारी के लिए कार्रवाई तेज कर दी है। टीमें बनाकर पूर्व वीसी के ठिकानों पर छापेमारी की जाएगी। हैरानी तो यह है कि पंजाब ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइजेशन (पीएचआरओ) ने असिस्टेंट प्रोफेसरों की ज्वाइनिंग में फर्जीवाड़ा व फाइनेंिशयल-फंड दुरुपयोग, कंस्ट्रक्शन समेत कई आरोपों की 12 साल पहले ही सीएम से शिकायत करते हुए पूर्व वीसी को हटाने की मांग की थी। यही नहीं कमेटियों की तरफ से जांच करने पर गड़बड़ियों की रिपोर्ट भी सामने आई लेकिन बाद में लगे वीसी की तरफ से कोई सख्त कार्रवाई करना जरूरी नहीं समझा गया। हालांकि विजिलेंस में पर्चा दर्ज होने के बाद मुहर लग पाई कि पूर्व वीसी बराड़ ने धोखाधड़ी मामले में संलिप्त रहे हैं। बता दें कि बीते 3 अक्टूबर 2011 को ही जीएनडीयू के अफसरों ने रिपोर्ट सौंप दी थी कि श्री गुरु हर राय साहिब कॉलेज वुमन होशियारपुर की पूर्व प्रिंसिपल जगजीत कौर ने जाली एलपीसी लगाई हुई है। प्रिंसिपल ने फ्रॉड किया है जो गंभीर मामला है। उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए लेकिन अंदरखाते सेटिंग के कारण मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता रहा। आरोपियों को बचाने की कोशिश की गई। फिलहाल, विजिलेंस के सीनियर आईपीएस अफसर की जांच में दोषी पाए जाने पर करीब 14 साल के बाद पर्चा दर्ज कर जीएनडीयू में असिस्टेंट प्रोफेसरों की धांधली में ज्वाइनिंग में शामिल कमेटी व सीनेट मेंबरों पर भी कार्रवाई हो सकती है। विजिलेंस के विश्वसनीय सूत्रों की मानें तो पूर्व वीसी बराड़ इस समय नोएडा में हैं। अदर स्टेट होने के कारण गिरफ्तारी के लिए वहां की सरकार से मंजूरी लेने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है, जबकि पूर्व प्रोफेसर जगजीत कौर इस समय ऑस्ट्रेलिया में हैं जिसके खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी होगा। वह जब भी भारत लौटती हैं, एयरपोर्ट पर गिरफ्तार कर ली जाएंगी। वहीं अवैध संपत्ति खंगालने के मामले को लेकर बात करें तो रिटायरमेंट के 4 साल बाद का नियम मुश्किल बनी हुई है जिसके लिए कानूनी विशेषज्ञों से सलाह ली जा रही कि पूर्व वीसी बराड़ व पूर्व महिला प्रोफेसर के अवैध संपत्तियों की जांच की जा सकती है या नहीं। दरअसल, नियम है कि सरकारी नौकरी से रिटायरमेंट के 4 साल बीतने पर अवैध संपत्ति की जांच नहीं की जा सकती। फिलहाल, दोनों ही आरोपियों की गिरफ्तारी तो तय है। बता दें पीएचआरओ की तरफ से जो शिकायत सीएम को भेजी गई थी उस मामले में उच्च अफसर गंभीरता से जांच करते तो पहले ही गड़बड़ियों को रोका जा सकता था। लेकिन ऐसा नहीं होने से बाद में जो वीसी आए उनके कार्यशैली पर भी सवाल उठने लगे हैं। .जीएनडीयू के वीसी प्रोफेसर एएस बराड़ को तुरंत हटाएं और आपराधिक कृत्यों की उच्च-स्तरीय जांच की जाए। पिछले 4 दशकों में स्थापित विश्वविद्यालय के शैक्षणिक और प्रशासनिक माहौल को खराब कर दिया है। .विश्वविद्यालय की सफाई का ठेका एक ऐसे व्यक्ति को दिया गया जिसे इसका कोई अनुभव नहीं था। इसके लिए 30 कर्मचारियों को नौकरी से हटा दिया गया। उत्तर पुस्तिकाओं की छपाई का काम भी एक बाहरी फर्म को दिया गया। जिससे विश्वविद्यालय की अपनी प्रेस मशीनरी बेकार हो गई। शिक्षक भर्ती और पदोन्नति में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं की गई। कुछ उम्मीदवारों को फायदा पहुंचाने के लिए उनके नंबरों में हेरफेर किया गया। कुछ मामलों में तो उम्मीदवारों को अधिकतम अंकों से भी ज्यादा अंक दिए गए। एक ही उम्मीदवार को अलग-अलग कॉलेजों के लिए अलग-अलग नंबर दिए गए। .इलेक्ट्रॉनिक्स और इंजीनियरिंग विभाग में सहायक प्रोफेसरों की भर्ती के दौरान साक्षात्कार (इंटरव्यू) की प्रक्रिया में भी अनियमितताएं की गईं। पाई गईं। पूरा साक्षात्कार प्रक्रिया पहले से तय (स्टेज मैनेज्ड) थी। यह साक्षात्कार केवल एक दिखावा था। यूजीसी के करियर एडवांसमेंट स्कीम के तहत शिक्षकों की पदोन्नति में भी इसी तरह का पक्षपात का खेल किया गया। पूर्व प्रोफेसर जगजीत कौर इस समय ऑस्ट्रेलिया में हैं जिसके खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी होगा। वह जब भी भारत लौटती हैं, एयरपोर्ट पर गिरफ्तार कर ली जाएंगी। वहीं विजिलेंस अपने सोर्स के जरिए पूर्व वीसी पर भी नजर बनाए हुए है कि विदेश भागने की कोशिश न करें। यदि ऐसी आशंका हुई तो उनके खिलाफ भी लुक आउट नोटिस जारी किया जा सकता है।


