ग्राउंड रिपोर्ट: 9 घंटे ट्रेन में बैठे रहे यात्री, न घर पहुंच पाए और न घूमने

सुबह 7 बजे बठिंडा पहुंची अहमदाबाद-जम्मू तवी एक्सप्रेस में सैकड़ों मुसाफिर परेशान हुए। कड़ाके की ठंड में ठिठुरते बच्चों, बुजुर्गों व महिला-पुरुषों को भारी-भरकम सामान के साथ ट्रेन से बाहर आना पड़ा । गुजरात के सैकड़ों परिवारों को रास्ता क्लियर होने तक 9 घंटे इंतजार करने की मजबूरी रही। राजकोट से पठानकोट के मनाली ट्रिप पर जा रहे 12 युवाओं की टोली का मूड खराब हो गया। सत्यपाल सिंह ने कहा कि वे मारवाड़ी यूनिवर्सिटी के विद्यार्थी हैं। शाम तक ट्रेन को रवाना करने की बजाए यहीं शार्ट टर्मिनेट कर दिया। टिकट कैंसिल तो नहीं हुई जबकि उन्हें बठिंडा से 6.30 बजे वाली ट्रेन का टिकट पर दोबारा खर्च करना पड़ा। सुबह 10 बजे बठिंडा पहुंची सयोनी-फिरोजपुर पातालकोट एक्सप्रेस में दिल्ली के पुखराज को अपने परिवार के साथ फिरोजपुर में अपने रिश्तेदार की रिटायरमेंट पार्टी में जाना था, अब स्टेशन पर ही चाय-बिस्कुट या पूड़ी खानी पड़ रही है। राजकुमार भी अपने परिवार के साथ ट्रेन में सोने को मजबूर हुए, वे अपनी बेटी को दिल्ली एयरपोर्ट पर आस्ट्रेलिया रवाना करके वापस आए हैं। राखी अपने छोटे बच्चों के साथ ट्रेन चलने का इंतजार करती रहीं, उन्हें कोटकपूरा जाना था । . जसविंदर सिंह उम्र 60 साल वासी मध्य प्रदेश ने बताया उन्हें अमृतसर जाना है। सुबह 7 बजे ट्रेन से बठिंडा पहुंच गए थे। स्टेशन पर जब ट्रेन बंद हुई तो उन्हें पता चला है कि पंजाब बंद कारण ट्रेन आगे नहीं जाएंगी। इस कारण वो बस स्टैंड पर पहुंचा तो यहां पता चला है कि बसें भी बंद हैं । . गांव हीरनावाली, जिला हनुमानगढ़ (राजस्थान) के रहने वाले मांगी लाल ने बताया कि मंगलवार को सुबह 10 बजे उसका अंबाला में यूके वीजा के लिए पेपर है। सुबह 10 बजे ट्रेन के जरिए बठिंडा आया था। आगे जाने के लिए कोई साधन नहीं मिल रहा, समय पर नहीं पहुंचा तो पेपर मिस हो जाएगा। भास्कर न्यूज । बठिंडा/मानसा एमएसपी की गारंटी का कानून समेत 13 मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे किसानों के समर्थन में वि​भिन्न किसान यूनियनों की ओर से सोमवार को पंजाब बंद के आह्वान का बठिंडा और मानसा जिलों में व्यापक असर देखने को मिला। बंद के दौरान करीब 10 घंटे तक रेल तथा बस यातायात पूरी तरह से ठप रहा। वहीं शहर के सभी बाजार, व्यापारिक प्रतिष्ठान, सब्जी मंडी में भी सन्नाटा पसरा रहा। हालांकि बंद के दौरान एमरजेंसी सेवाएं, अस्पताल, मेडिकल स्टोर, पैट्रोल व सीएनजी पंप, बैंक, डाकघर आम दिनों की भांति खुले रहे। सुबह 7 बजते ही किसानों ने नेशनल हाईवे तथा रेलवे ट्रैक पर धरना लगा दिया। बंद के दौरान बठिंडा जिले में 7 जगहों पर किसानों ने सड़क तथा रेलवे ट्रैक पर बैठकर लगातार 10 घंटे यातायात ठप रखा। वहीं मानसा िजले के भीखी, बुढ़लाडा, बरेटा, सरदूलगढ़ सहित अन्य कई जगहों पर किसान धरना लगाकर बैठे रहे। बंद के चलते नेशनल हाईवे से गुजरने वाले लोगों तथा यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा तथा लोग घंटों हालात सामान्य होने का इंतजार करते रहे। कई जगहों पर ट्रैफिक जाम की स्थिति भी बनी रही। बठिंडा में किसानों ने बठिंडा श्री अमृतसर राष्ट्रीय राजमार्ग और अबोहर रोड बंद करने के लिए शहर के कन्हैया चौक, बठिंडा-डबवाली रोड पर संगत मंडी कैंचियां, तलवंडी साबो के रविदास चौक, मौड़-रामनगर कैंचियां तथा ब​ठिंडा-चंडीगढ़ रोड पर मौड़-रामपुरा चौक, रामपुरा फूल रेलवे स्टेशन पर धरना दिया। भाकियू एकता उग्राहां ने भी मौड़, तलवंडी तहसील में धरना तथा बठिंडा रामपुरा फूल में केंद्र सरकार खिलाफ पुतला फूंक प्रदर्शन किया। मंडियों में बंद की स्थिति… पढ़ें पेज 4 पर कन्हैया चौंक पर लगाए धरने को संबोधित करते भाकियू एकता सिद्धूपुर के जनरल सचिव रेशम ​सिंह यात्री तथा अन्य नेताओं ने कहा जब तक मोदी सरकार किसानों की मानी गई मांगों को लागू नहीं करती तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा उनके प्रधान जगजीत सिंह डल्लेवाल 26 नवंबर से मरणव्रत पर बैठे हैं, लेकिन 35 दिन होने के बावजूद केंद्र सरकार ने उनके साथ कोई बातचीत नहीं की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि डल्लेवाल को कुछ हुआ तो पंजाब में जो हालात पैदा होंगे उसके लिए केंद्र की मोदी सरकार जिम्मेवार होगी। 150+ बसें बंद, डिपो को 40 लाख रुपए का नुकसान बठिंडा बस स्टैंड से सरकारी तथा प्राइवेट बसों का संचालन पूरी तरह से ठप रहा। बठिंडा बस स्टैंड से 50 के करीब सरकारी बसें अलग-अलग राज्यों के लिए लंबे रुटों पर चलती हैं। इसके अलावा लोकल रुटों पर भी 100 से ज्यादा और ग्रामीण रुटों पर भी बसें चलती हैं। लेकिन बंद कारण कोई बस अपने निर्धा​ि​रत रुट पर नहीं चली। बठिंडा डिपो को प्रतिदिन करीब 40 लाख रुपये की आमदनी होती है। लेकिन बसें नहीं चलने से बठिंडा डिपो को वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा। सुबह बाजार बंद, शाम को खुले…लेकिन ग्राहकी शून्य पार मंडल की ओर से बंद का समर्थन करने का कोई फैसला तो नहीं लिया जबकि आवागमन के रास्ते बंद होने पर बाहरी ग्राहकों के शहर में न आने के मद्देनजर बाजार बंद रखे गए, ऐन मौके पर दुकानदारों ने ग्राहकी न होने की अंदेशे पर दुकानें न खोलकर बाजारों में धूप सेंककर टाइम पास किया। भले ही शाम 4 बजे दुकानों के शटर खुल गए लेकिन बंद के मद्देनजर शहर के लोग भी घरों से बाहर नहीं निकले जिससे मुख्य बाजारों में सन्नाटा छाया रहा।

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