राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जन्म शताब्दी वर्ष में प्रदेशभर में अनेक कार्यक्रम होंगे। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि संघ प्रदेश के प्रत्येक घर पर जाएगा। संघ की वास्तविकता से रूबरू कराएगा। संघ के बारे में वह सब बताया जाएगा, जिसके बारे में उस घर का परिवार या तो कुछ नहीं जानता, अथवा उसके मन में संघ के प्रति गलत धारणा है। प्रदेश के करीब 1.60 करोड़ परिवारों तक पहुंचने के लिए संघ के करीब 4 लाख स्वयंसेवक तैयार हैं। संघ की दृष्टि से राजस्थान के तीन प्रांत चित्तौड़गढ़, जयपुर और जोधपुर हैं, जिनमें संघ का यह पंच परिवर्तन का संकल्प साकार करने की तैयारी है। वर्ष 1925 में नागपुर में संघ की स्थापना हुई थी। तब से लगातार बढ़ते संघ को इस पंच परिवर्तन संकल्प से वृहद विस्तार देने का मानस है। संघ के क्षेत्रीय संघचालक डॉ. रमेश अग्रवाल का कहना है कि इस वर्ष विजयादशमी के दिन संघ की स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं। जन्म शताब्दी वर्ष के दौरान संघ का उद्देश्य उत्सव मनाना नहीं है, बल्कि आत्मचिंतन करना, संघ कार्य के लिए समाज द्वारा दिए समर्थन के लिए आभार प्रकट करना तथा राष्ट्र एवं समाज को संगठित करने के लिए स्वयं को पुनः समर्पित करना है। इसी तरह के पंच परिवर्तन के संकल्प के साथ संघ के स्वयंसेवक प्रत्येक जन तक पहुंचेंगे। सामाजिक सद्भाव बैठक
शताब्दी वर्ष के दौरान अगले वर्ष मार्च माह में सामाजिक सद्भाव बैठकों का आयोजन होगा। इसका उद्देश्य समाजों में आपसी सद्भाव विकसित करना है। समाज की कमियों को दूर करना, सामाजिक नेतृत्व विकसित करना, समाजों काे परस्पर पूरक बनना, हिंदू होने के नाते एक-दूसरे के साथ खड़े होना न कि जातियों में विभक्त होकर तनाव बढ़ाना। इसका उद्देश्य भी साझी समस्याओं का साझा समाधान निकालना है। इनके अलावा प्रमुख जन गोष्ठी, युवा कार्यक्रम सहित कई अन्य कार्यक्रम भी इस शताब्दी वर्ष का हिस्सा होंगे। जिसमें मातृशक्ति, युवा वर्ग को जोड़ना और संघ दर्शन कराना, राष्ट्र के विषय में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना उद्देश्य है। अंत में संघ के विस्तार के रूप में अधिकतम स्थानों पर शाखा स्थापित करने का संकल्प तय किया जाएगा। उद्देश्य : अपनी टोली का चिंतन दायरा बढ़ाना संघ के स्वयंसेवक व्यापक गृह संपर्क अभियान के अंतर्गत 15 से 30 नवंबर के बीच घर-घर जाएंगे। देश एवं समाज के समसामयिक विषयों में समाज की समझ बढ़ाना तथा उनके माध्यम से टोली का चिंतन दायरा बढ़ाना उद्देश्य है। संघ के 1 से 4 स्वयंसेवकों की टोलियां घर-घर जाएंगी। एक दिन में एक टोली 7 से 10 घरों तक पहुंचेगी। परिवार के प्रत्येक सदस्य से चर्चा करेगी। पंच परिवर्तन की यह सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होगा। इस जनसंपर्क के दौरान स्वयंसेवकों के पास लिखित में पत्रक होंगे। जिन्हें निशुल्क बांटा जाएगा। जिस क्षेत्र में जैसी भाषा प्रयोग में लाई जाती है, वही भाषा में वह पत्रक होगा। राष्ट्र विषयक सशुल्क पुस्तकें भी घर-घर पहुंचाई जाएंगी। अग्रवाल का कहना है कि परिवारों में पत्रक बांटना उद्देश्य नहीं, उन परिवारों से आत्मीय संबंध बनाना और आपसी सद्भाव के साथ उन्हें जोड़ना उद्देश्य है।


