तात्यापारा की मंजू संत! पिछले 37 वर्षों में न सिर्फ एक छोटे से ब्यूटी पार्लर को संभाला है, बल्कि आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को निशुल्क ब्यूटीशियन प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वरोजगार की राह पर भी अग्रसर किया है। मंजू अब तक 55 से अधिक लड़कियों को बिना कोई फीस लिए प्रशिक्षित कर चुकी हैं, जिससे उनकी जिंदगी में उम्मीद की नई किरण जगी है। मंजू का मानना है कि हर लड़की को अपने सपनों को पूरा करने का मौका मिलना चाहिए, चाहे उसके पास आर्थिक संसाधन हों या नहीं। इसी सोच के साथ उन्होंने 2010 में ‘1 रुपए में दुल्हन सजाने’ की पहल शुरू की। बीपीएल कार्ड या स्थानीय सामाजिक संगठनों की अनुशंसा पर अब तक वे 30 से अधिक गरीब दुल्हनों को प्रतीकात्मक रूप से 1 रुपए लेकर उन्हें सजाकर उनका दिन यादगार बनाया है। वो अपनी सहयोगियों के साथ हर दो महीने में वृद्धाश्रम जाकर वहां की महिलाओं के बाल-नाखून काटती हैं। इसके लिए वो किसी से एक रुपए भी नहीं लेतीं। विशेष बच्चों के लिए भी वे इसी तरह काम कर रहीं हैं। 1000 से अधिक युवतियों को बनाया आत्मनिर्भर
मंजू बताती हैं कि उनके संस्थान में 1000 से अधिक युवतियों को ब्यूटीशियन का प्रशिक्षण दिया गया है। इनमें से 55 से अधिक लड़कियों से उन्होंने कोई राशि नहीं ली। उनका लक्ष्य है कि हर साल कम से कम दो छात्राओं को मुफ्त में कोर्स कराएं। कोर्स की अवधि छह महीने से लेकर एक वर्ष तक होती है, जिसमें मेकअप, हेयर स्टाइलिंग, स्किन केयर और साड़ी ड्रेपिंग जैसे विषय शामिल हैं। कोर्स के साथ-साथ एक शुरुआती ब्यूटी किट भी दी जाती है ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें। 2015 से ब्लाइंड स्कूल और मूकबधिर केंद्र में दे रहीं सेवा
सेन समाज के जिलाध्यक्ष डॉ. मनोज ठाकुर द्वारा अर्पण विद्यालय न्यू राजेंद्रनगर, आदिवासी दिव्यांग आश्रम अभनपुर, चितवन वृद्धाश्रम, कोपलवाणी मूकबधिर केंद्र, घरोंदा केंद्र में हर महीने के निशुल्क बाल काटने की सेवा दी जाती है। वहीं, मंजू द्वारा 2015 से प्रेरणा ब्लाइंड स्कूल और कोपलवाणी मूकबधिर केंद्र में विशेष बच्चों के लिए निशुल्क सेवा दी जाती है। वह हर दो महीने में इन संस्थाओं में जाकर लगभग सौ से अधिक बच्चों के बाल काटने व नाखून सजाने के साथ हल्का मेकअप भी कर देती हैं।


