अध्यक्ष, कोषाध्यक्ष व सचिव ही होंगे भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) अब सरकार के नए राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम 2025 के दायरे में आने जा रहा है। यह बदलाव भारतीय खेलों की प्रशासनिक पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। हालांकि, बीसीसीआई को इस कानून के तहत भी सूचना के अधिकार (आरटीआई) से छूट मिलेगी। क्रिकेट एक्सपर्ट का मानना है कि यह छूट बोर्ड की स्वयं निर्णय के अधिकार को तो बनाए रखेगी, लेकिन पारदर्शिता को लेकर सवाल फिर भी बने रहेंगे। नए खेल अधिनियम में साफ प्रावधान है कि राष्ट्रीय महासंघों में केवल अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष के पद ही वास्तविक प्रशासनिक भूमिका में रहेंगे। यानी अब तक जो बड़े पदाधिकारियों की व्यापक समिति का ढांचा दिखता था, उसमें निर्णायक शक्ति सिर्फ तीन लोगों तक सीमित हो जाएगी। इससे बोर्ड के भीतर लंबे समय से चली आ रही शक्ति संतुलन की राजनीति नए स्वरूप में बदलने की उम्मीद है। नतीजा आगामी 28 सितंबर को होने वाले चुनाव से पहले यह साफ है कि बीसीसीआई जिस भी नियम के तहत चुनाव कराएगा, उसका सीधा असर भविष्य की सत्ता संरचना पर पड़ेगा। अधिनियम लागू होते ही बोर्ड औपचारिक रूप से सरकारी नियंत्रण की जद में तो आ जाएगा, लेकिन आरटीआई से बचकर वह अपनी पुरानी परंपरा यानी आंशिक स्वायत्तता को कायम रखेगा। छत्तीसगढ़ के प्रभतेज भाटिया अभी कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे है। ऐसे में चुनाव के बाद वे संयुक्त सचिव बनते हैं, तो उनका पद भी स्वमेव समाप्त हो जाएगा। आरटीआई से छूट, पदाधिकारियों की आयु सीमा हो सकती है 75 वर्ष भारत सरकार ने राष्ट्रीय खेल प्रशासन को मजबूत करने के लिए भारतीय खेल अधिनियम 2025 लागू किया है। अधिनियम के तहत अब सभी राष्ट्रीय महासंघ अपने चुनाव तय नियमों के अनुसार कराएंगे। बीसीसीआई सहित प्रमुख महासंघ इस कानून के दायरे में आएंगे, लेकिन उन्हें आरटीआई से छूट मिलेगी। नए कानून में अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष तीनों ही निर्णायक पद होंगे, जबकि अन्य पद केवल प्रशासनिक भूमिका निभाएंगे। पदाधिकारियों की आयु सीमा 75 वर्ष तक हो सकती है, बशर्ते अंतरराष्ट्रीय महासंघ अनुमति दे।


