आकाश VS संदीप – निगम के सभापति ने 5 कांग्रेसी पार्षदों की राय जानने 23 सितंबर को बुलाया नेता प्रतिपक्ष को लेकर कांग्रेस पार्षदों की सियासी यात्रा नगर निगम के राजनीतिक गलियारे में चर्चा का विषय है। पूर्व में कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा देने वाले पार्षद संदीप और 4 महिला पार्षदों के पति इन दिनों जगन्नाथ पुरी की यात्रा पर हैं। सोशल मीडिया में वायरल हो रहे उनके फोटो और एकजुटता नेता प्रतिपक्ष की स्थिति स्पष्ट होने पर फिर से सस्पेंस बना रहे हैं। नगर निगम के सभापति सूर्यकांत राठौर ने उन्हें 23 सितंबर को बुलाया है। नेता प्रतिपक्ष के लिए कांग्रेस पार्टी के निर्णय पर सभापति उनका अभिमत लेंगे और इसके बाद रायपुर में पिछले आठ महीने से चल रहे विवाद किसी निर्णय पर पहुंच सकता है। हालांकि पांचों पार्षदों की एकजुटता पार्टी के निर्णय के खिलाफ उनकी एक विशेष मनोस्थिति की ओर इशारा कर रही है। कांग्रेस के प्रदेश और जिला नेतृत्व ने आकाश तिवारी को नेता प्रतिपक्ष बनाने की घोषणा कर दी है। इस संबंध में उन्होंने नगर निगम में महापौर, निगम कमिश्नर और सभापति को पार्टी का निर्णय बताते हुए पत्र भी लिख दिया है। हालांकि सभापति ने इसपर कांग्रेस पार्षदों के अभिमत लेने का पत्ता फेंक दिया है। जब पार्टी ने नेता प्रतिपक्ष घोषित कर दिया है और इस्तीफा देने वाले पांचों पार्षदों ने नेता प्रतिपक्ष का विवाद उपजने के बाद दिया इस्तीफा वापस ले लिया है। यह पार्टी के निर्णय पर पार्षदों की मौन सहमति मानी जा सकती है। इस आधार पर निगम की ओर से आकाश तिवारी को नेता प्रतिपक्ष स्वीकार किया जा सकता है। कांग्रेस के पांच पार्षदों के तेवर और सभापति के सामने उपस्थित होने से पहले उनकी संयुक्त यात्रा राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय है। जिसे भी मिलेगा पद, रहेंगे अलग-थलग अर्जुमन और शेख मुशीर विवाद से दूर नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष का पद संवैधानिक नहीं है। नगर निगम एक्ट में इस संबंध में किसी तरह का कोई प्रावधान नहीं है। नेता प्रतिपक्ष की व्यवस्था एक परंपरा की तरह चल रही है। इस कार्यकाल में नेता प्रतिपक्ष का वजूद बहुत छोटा रहेगा। कांग्रेस के महज सात पार्षद जीतकर निगम पहुंचे हैं। आकाश तिवारी के पार्टी ज्वाइन करने के बाद उनकी संख्या 8 हो गई। दो पार्षद अर्जुमन ढेबर और शेख मुशीर ने नेता प्रतिपक्ष विवाद से खुद को अलग कर लिया है। वे पार्टी के साथ हैं। कांग्रेस के पांचों पार्षद पार्टी के निर्णय के खिलाफ संदीप साहू को नेता प्रतिपक्ष बनाने सभापति को अभिमत देते हैं तो वे अलग-थलग पड़ जाएंगे। अर्जुमन ढेबर, शेख मुशीर और आकाश तिवारी का उन्हें सपोर्ट मिलना मुश्किल है। सभापति अगर कांग्रेस पार्टी के निर्णय को महत्व देते हुए आकाश को नेता प्रतिपक्ष बनाते हैं तो पांचों पार्षदों निसंदेह उनका समर्थन नहीं करेंगे। वे निर्दलीय चुनाव लड़कर वापस पार्टी में लौटने और पद दिए जाने को लेकर नाराज हैं। कांग्रेस के पार्षद दो फाड़ में हैं जबकि निगम में भाजपा पार्षदों की संख्या 61 है। ऐसी स्थिति में विपक्ष और बनने वाले नेता प्रतिपक्ष बेबस ही रहेगा।


