पंजाब के पूर्व मंत्री हरमेल टोहड़ा का निधन:मोहाली में ली अंतिम सांस, 77 वर्ष के थे, 23 सितंबर को अंतिम संस्कार

पंजाब के पूर्व कैबिनेट मंत्री सरदार हरमेल सिंह टोहड़ा का आज शाम मोहाली के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वे 77 वर्ष के थे और पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे। वे दिग्गज अकाली नेता और जत्थेदार स्वर्गीय गुरचरण सिंह टोहड़ा के दामाद थे। हरमेल सिंह 1997 में डकाला (अब सनौर) विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए और कैबिनेट मंत्री बने। उनका अंतिम संस्कार 23 सितंबर, मंगलवार को सुबह 11 बजे उनके पैतृक गांव टोहड़ा में किया जाएगा। हरमेल सिंह के परिवार में पत्नी बीबी कुलदीप कौर टोहड़ा, दो बेटे हरिंदरपाल सिंह टोहड़ा व कंवरबीर सिंह टोहड़ा और दो बेटियां डॉ. जसप्रीत कौर टिवाना व गुरमनप्रीत कौर शामिल हैं। टोहड़ा ने कहा था- लोग सुखबीर बादल का घमंड तोड़ देंगे
हरमेल सिंह टोहड़ा पंजाब की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे। उन्होंने पटियाला देहाती के इंचार्ज पद से हटाए जाने के बाद शिरोमणि अकाली दल के खिलाफ मोर्चा खोला और पार्टी में अपने परिवार सहित विरोध की स्थिति अपनाई थी। उनका आरोप था कि पार्टी प्रधान सुखबीर सिंह बादल ने उन्हें साफ शब्दों में कहा था कि उनके पास पैसे नहीं हैं, इसलिए उन्हें टिकट नहीं मिल सकता। हरमेल सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा था कि अकाली दल अब साफ-सुथरी छवि वाले नेताओं को तरजीह नहीं देता और इस बार लोग सुखबीर बादल के घमंड को तोड़ देंगे। पटियाला में आवास पर हमला हुआ था
पूर्व मंत्री हरमेल सिंह टोहड़ा के परिवार को भी हाल के वर्षों में कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। 25 सितंबर 2023 को उनके पटियाला स्थित आवास पर कुछ अज्ञात हमलावरों ने हमला कर दिया था। हमलावरों ने गेट तोड़ने की कोशिश की और घर पर ईंट-पत्थर फेंके थे। यह पूरा मामला सीसीटीवी में कैद हो गया था, लेकिन पुलिस कार्रवाई न होने से परिवार ने चिंता जताई थी। कभी यही आवास जत्थेदार गुरचरण सिंह टोहड़ा (हरमेल सिंह के ससुर) का भी सियासी केंद्र हुआ करता था, जहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहते थे। उस घटना के बाद हरमेल सिंह टोहड़ा ने पंजाब के डीजीपी से परिवार की सुरक्षा और हमलावरों की गिरफ्तारी की गुहार भी लगाई थी। पिता ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान SGPC प्रधान थे
1984 में में हुए ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान हरमेल के पिता गुरचरण सिंह टोहड़ा एसजीपीसी के अध्यक्ष थे और उन्होंने दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता का काम किया था। 1999 में पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल और गुरचरण टोहड़ा के बीच विवाद हो गया जिसके कारण उन्हें एसजीपीसी अध्यक्ष पद से हटा दिया गया था, जिसके बाद टोहड़ा ने अखिल भारतीय शिरोमणि अकाली दल बनाई, लेकिन चुनाव में ये दल अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाया। फरवरी 2002 के विधानसभा चुनावों के बाद टोहड़ा और प्रकाश सिंह बादल के बीच मतभेद धीरे-धीरे कम हुए। जून 2003 में दोनों नेताओं ने विवाद भुला दिया और जुलाई 2003 में टोहड़ा को फिर से एसजीपीसी अध्यक्ष नियुक्त किया गया।

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