भास्कर न्यूज | जालंधर पंजाब रोडवेज पनबस व पीआरटीसी कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन की मीटिंग प्रदेश संस्थापक कमल कुमार की अगुआई में हुई। जिसमें सूबा चेयरमैन बलविंदर सिंह राठ, सूबा प्रधान रेशम सिंह गिल, रमनदीप सिंह कैशियर, उपाध्यक्ष गुरप्रीत सिंह पन्नू ने कहा कि लंबे समय से सरकार और विभाग के अधिकारियों द्वारा कच्चे कर्मचारियों का शोषण किया जा रहा है। पिछले कई सालों से बार-बार मीटिंगों के बावजूद समस्याओं का समाधान करने के बजाय, सरकार हर दिन नई गलत नीतियां ला रही है जिससे विभागों के निजीकरण की तरफ बढ़ाया जा रहा है। पंजाब रोडवेज, पनबस व पीआरटीसी में लगभग 90 फीसदी कर्मचारी कच्चे हैं। वे विभागों को चलाने के लिए कड़ी मेहनत और परिश्रम कर रहे हैं। पंजाब के मुख्यमंत्री ने चुनावी घोषणा पत्र में बड़ा ऐलान किया था कि सरकार बनते ही सभी कच्चे कर्मचारियों को पक्का कर दिया जाएगा, आज सरकार बने साढ़े 3 साल से ज्यादा हो गए हैं। परिवहन विभाग का एक भी कच्चा कर्मचारी पक्का नहीं किया गया है। पिछले साल 1 जुलाई 2024 को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में संगठन के साथ एक पैनल मीटिंग हुई थी, जिसमें परिवहन विभाग के लिए अलग नीति बनाने, ठेकेदार बिचौलियों को हटाने और कर्मचारियों को मूल विभागों में सेवा नियमों के तहत स्थायी करने के आदेश दिए गए थे। लेकिन, मैनेजमेंट पंजाब के मुख्यमंत्री के आदेशों की अनदेखी करते हुए संगठन की मांगों को अनदेखा कर रही है, जिसके कारण पंजाब के परिवहन विभाग के कच्चे कर्मचारियों का शोषण हो रहा है और विभागों का निजीकरण करने की मंशा साकार हो रही है। निजी मालिकों की बसों को किलोमीटर स्कीम के तहत लाने का मुद्दा मैनेजमेंट पर थोपा गया है। मुफ्त बस यात्रा सुविधा के 1200 करोड़ रुपये अभी वसूले जाने बाकी महासचिव शमशेर सिंह ढिल्लों, संयुक्त सचिव जगतार सिंह, राज्य कैशियर बलजीत ने बोलते हुए कहा कि पंजाब सरकार पनबस/पीआरटीसी कर्मचारियों की मांगों को मानने में विफल रही है, जिसके कारण लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। बैठकों में कोई ठोस समाधान नहीं निकला है, जबकि यूनियन के उच्च पदाधिकारियों सहित सरकार के साथ 50 से अधिक बैठकें हो चुकी हैं। सरकार जानबूझकर मांगों का समाधान नहीं करना चाहती है, जबकि कम वेतन वाले कर्मचारी ही पंजाब की जनता को मुफ्त यात्रा की सुविधा दे रहे हैं, फिर भी उन्हें हर महीने समय पर वेतन नहीं दिया गया है। विभागों द्वारा सरकार से मुफ्त यात्रा सुविधा का लगभग 1200 करोड़ रुपये अभी तक वसूला जाना बाकी है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने मांगों का तुरंत समाधान नहीं किया तो 29 सितंबर को परिवहन विभाग के कच्चे कर्मचारी पैदल मार्च करेंगे और विरोध प्रदर्शन करेंगे। अगर सरकार ने फिर से मांगों का समाधान नहीं किया, तो तुरंत हड़ताल की जाएगी और तीखा विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।


