भास्कर न्यूज | अमृतसर नगर निगम ने 11 साल के बाद शहर में बिल्डिंगों का डेटा जुटाने के लिए वार्ड 37 के सुल्तानविंड इलाके में ड्रोन सर्वे शुरू कराया। कोलकाता की साइबर स्विफ्ट कंपनी सर्वे कर रही है। 23 सितंबर तक 2 ड्रोन और मंगवाए जाएंगे ताकि काम तेजी से हो सके। 3 ड्रोन एकसाथ शहर के अलग-अलग इलाकों में उड़ेंगे। सर्वे किए जाने के बाद निगम की तरफ से रेजिडेंशियल-कॉमर्शि यल या दूसरे जो भी भवन होंगे उनके मालिकों को यूआईडी जारी की जाएगी जो 13 अंकों की होगी। डोर-टू-डोर के लिए फील्ड में 21 टीमें लगाई गई हैं जो लोगों से जानकारी जुटाकर रिपोर्ट तैयार करेंगी। ड्रोन पायलटों को बता दिया जाएगा कि किस दिन कौन से इलाके में उड़ाया जाना है। 30 से 32 मीटर ऊंचाई पर ड्रोन उड़ाए जाएंगे तो 7 से 8 स्कवेयर मीटर एरिया को कवर करेगा। जिसके बाद डेटा कंपनी को भेजा दिया जाएगा। जिसका सैंपल चार्ज बनाए जाने के बाद निगम अफसरों को भेजा जाएगा। फिर यूआईडी नंबर तैयार कराए जाएंगे। बता दें कि प्रॉपर्टी का डेटा कलेक्ट करने के लिए ड्रोन सर्वे तो शुरू कर दिया गया है, लेकिन आर्मी वाले एरिया में ड्रोन उड़ाने के लिए जानकारी देनी होगी। बता दें कि इससे पहले 2013-14 में जीआईएस सर्वे किया गया था। तब करीब 3.58 लाख संपत्तियों की डिजिटल मैपिंग हुई थी लेकिन कंपनी के बीच में ही काम छोड़कर चले जाने से सर्वे अधूरा रह गया। अनुमान लगाया जा रहा है कि शहर में करीब 4 लाख इमारतें होंगी। वाल्ड सिटी में ड्रोन के माध्यम से लिडार टेक्नोलॉजी के जरिए सर्वे किया जाएगा ताकि संकरी गलियों में मौजूद संपत्तियों की भी 3डी मैपिंग की जा सके। दरअसल, इस मैपिंग से किसी भी वस्तु या परिवेश का त्रि-आयामी (3डी) दृश्य तैयार होता है। जिसमें गहराई, आकार और लेआउट को सटीक रूप से कैप्चर किया जाता है। यह सेंसर या कैमरों से डेटा एकत्र करती है। इसके बाद विशेष सॉफ्टवेयर से प्रोसेस करती है। इसके बाद एक डिजिटल मॉडल बनाती है। इसका प्रयोग शहरी नियोजन, निर्माण, रियल एस्टेट, वर्चुअल रियलिटी व ड्रोन मैपिंग जैसे विभिन्न क्षेत्रों में विस्तृत विजुलाइजेशन और स्थानिक समझ के लिए करते हैं।


