पहाड़ी ब्लॉक में पोषाहार के 3.19 करोड़ रुपए के घोटाले की जांच अभी चल ही रही है, वहीं दूसरी तरफ अब मिड-डे-मील योजना में 1.96 करोड़ रुपए की गड़बड़ी सामने आई है। आरोप है कि तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी (प्राथमिक शिक्षा) मनोज खुराना ने नियमों को ताक पर रखकर, जिला कलेक्टर की मंजूरी लिए बिना ही करोड़ों रुपये सीधे विद्यालयों के खातों में ट्रांसफर कर दिए। इतना ही नहीं, ब्लॉक स्तर से भेजी गई मांगों का परीक्षण भी नहीं हुआ और करीब 10 लाख रुपए की अतिरिक्त मांग भी गलत तरीके से भेज दी गई। जिला कलेक्टर उत्सव कौशल ने इस पूरे प्रकरण को गंभीर वित्तीय अनियमितता मानते हुए खुराना को नोटिस थमाया है और तीन दिन में लिखित जवाब मांगा है। गौरतलब है कि इससे पहले पहाड़ी ब्लॉक में उजागर हुए 3.19 करोड़ के घोटाले में कागजों पर हजारों लीटर दूध और भोजन बांटने का फर्जीवाड़ा दर्ज किया गया था। बच्चों तक न तो दूध पहुंचा और न थालियों में भोजन। कई मदरसों का अस्तित्व तक नहीं था, लेकिन उनके नाम पर करोड़ों की राशि निकाल ली गई थी। उस मामले ने पूरे प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था की जड़ों को हिला दिया था। लगातार सामने आ रही इन गड़बड़ियों से साफ हो गया है कि बच्चों के अधिकार और उनके भविष्य से सबसे बड़ी धोखाधड़ी हो रही है। एक के बाद एक घोटालों ने राजस्थान की शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। 3.19 करोड़ के घोटाले की जांच अभी लंबित अब कलेक्टर ने डीईओ को थमाया नोटिस भास्कर एक्सपर्ट – नीलकमल गुर्जर, पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी ब्लॉक स्तर पर जिम्मेदारी तय हो मामला से लगता है विभागीय स्तर पर निगरानी बेहद कमजोर रही है। नियमानुसार एक लाख से अधिक की राशि जिला कलेक्टर की अनुमति से ही खर्च हो सकती है, इस प्रक्रिया को दरकिनार किया गया। समय रहते मांगों की जांच की व्यवस्था सख्ती से लागू होती तो करोड़ों का नुकसान रोका जा सकता था। ब्लॉक स्तर पर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए थी। “शिक्षा योजनाओं में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। बिना अनुमोदन किए गए भुगतान नियमों का घोर उल्लंघन है। 3 दिन में लिखित जवाब मांगा है। आगे हर भुगतान की जांच कड़ी निगरानी में होगी, ताकि बच्चों के हितों से कोई समझौता न हो।”
-उत्सव कौशल, जिला कलेक्टर, डीग।


