माध्यमिक शिक्षा में स्वीकृत पदों में से बड़ा हिस्सा खाली है। 1 लाख 22 हजार से अधिक खाली पद, जिनमें शिक्षकों से प्रशासनिक अधिकारी तक शामिल है। यह कमी लाखों बच्चों के भविष्य को प्रभावित करेगी। विशेषकर दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों में जहां पहले से ही सुविधाओं का अभाव है। शिक्षा विभाग में कुल 4.8 लाख से ज्यादा पद स्वीकृत हैं, जिनमें से केवल 2.90 लाख पद भरे हुए हैं। जबकि 1.22 लाख पद खाली हैं। विभिन्न संवर्गों में खाली पदों की स्थिति और भी चौंकाने वाली है। कुछ वर्गों में 90% से अधिक पद खाली पड़े हैं। पढ़ाई से सीधे जुड़े पदों में प्राचार्य, उप-प्राचार्य और विभिन्न विषयों के प्राध्यापकों के ही 32 हजार से ज्यादा पद खाली हैं। व्यवस्था बनाए रखने वाले उच्चाधिकारियों के पद भी खाली हैं। अतिरिक्त निदेशक सिर्फ एक कार्यरत है और दो पद खाली हैं। संयुक्त निदेशक पद की स्थिति और भी खराब है। ये कुल 18 होने चाहिए मगर सिर्फ तीन ही कार्यरत हैं। 67 उपनिदेशकों में से 31 कार्यरत हैं। इसी तरह जिला शिक्षा अधिकारी एवं समकक्ष 534 पदों में से 453 कार्यरत हैं, 81 पद खाली हैं। इन प्रशासनिक पदों के खाली रहने से भी स्कूलों में व्यवस्था निर्माण में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विद्यालयों के मुखिया, प्राचार्य और उनके समकक्षों के पदों पर भी भारी कमी है। प्राचार्य एवं समकक्ष के 19 हजार से ज्यादा पद हैं। इनमें से 14 हजार ही कार्यरत हैं। इसी तरह उप-प्राचार्य एवं समकक्ष के 12 हजार से ज्यादा स्वीकृत पदों में से सिर्फ 1700 कार्यरत हैं। इनके 11 हजार से ज्यादा पद खाली पड़े हैं। यह 90.07% की चौंकाने वाली दर है। विभिन्न विषय अध्यापकों के 57 हजार से ज्यादा पद स्वीकृत है। मगर 40 हजार से ज्यादा कार्यरत हैं और 16,828 पद खाली हैं। इसी तरह वरिष्ठ अध्यापक के 1.09 लाख पद हैं। इनकी तुलना में 41 हजार पद खाली हैं। प्राचार्य एवं समकक्ष के 5 हजार से ज्यादा, उप प्राचार्य एवं समकक्ष के 11 हजार से ज्यादा पद खाली है। अध्यापक लेवल 1-2 दोनों में अधिशेष बताए सितंबर महीने की रिपोर्ट में शिक्षा विभाग ने बताया है कि अध्यापक लेवल-1 (माध्यमिक शिक्षा) में 53,152 स्वीकृत पदों में से 55,290 कार्यरत हैं। यह एकमात्र ऐसा संवर्ग है जहां स्वीकृत पदों से 2,138 ज्यादा शिक्षक कार्यरत हैं। यह संभवतः पदोन्नति या समायोजन के कारण हो सकता है। वहीं अध्यापक लेवल-2 (माध्यमिक शिक्षा) में भी 49,940 स्वीकृत पदों की तुलना में 50,074 कार्यरत बताए गए हैं। वहीं, शारीरिक शिक्षा अध्यापकों के 18 हजार से ज्यादा स्वीकृत पदों पर 17 हजार से ज्यादा कार्यरत हैं।


