पाकुड़ जिले के लिट्टीपाड़ा प्रखंड से 8 किलोमीटर दूर करमाटांड़ पंचायत का पड़ाम गांव मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। यह पहाड़िया आदिवासी बहुल गांव है, जहां लगभग 35 परिवारों में 200 लोग रहते हैं। गांव में एक भी हैंडपंप नहीं है। ग्रामीणों को एक किलोमीटर दूर पहाड़ी झरने से पानी लाना पड़ता है। वहीं, पशु भी इसी झरने का पानी पीते हैं। बारिश के मौसम में झरना राहत देता है, लेकिन दिसंबर के बाद यह सूख जाता है। तब लोगों को डेढ़ किलोमीटर दूर पथरीले रास्ते से पानी लाना पड़ता है। उबड़-खाबड़ पथरीले रास्तों से आवागमन करते हैं लोग गांव में पक्की सड़क नहीं है। लोग उबड़-खाबड़ पथरीले रास्तों से आवागमन करते हैं। 35 परिवारों में से केवल 9 को आवास योजना का लाभ मिला है। कई आवास योजना के मकान अधूरे पड़े हैं। जानकारी के अभाव में ग्रामीणों को बिचौलियों पर निर्भर रहना पड़ता है। बिचौलिए अधूरा काम छोड़कर चले गए हैं। गांव में आंगनबाड़ी केंद्र भी नहीं गांव में रोजगार के अवसर नहीं हैं। कोई सरकारी योजना नहीं चल रही है। ग्रामीण पहाड़ी खेती पर निर्भर हैं। इससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार नहीं हो पा रहा है। गांव में आंगनबाड़ी केंद्र भी नहीं है। आजादी के सात दशक बाद भी गांव की तस्वीर नहीं बदली है। कुछ समस्याओं के निराकरण में विलंब हो रहा है: बीडीओ इधर, प्रखंड विकास पदाधिकारी संजय कुमार ने बताया कि पड़ाम गांव पहाड़ की ऊंचाई पर है और वहां मूलभूत सुविधा उपलब्ध कराने का हर संभव प्रयास किया गया है उन्होंने कहा कि आवागमन को लेकर काफी असुविधा होती है। इस कारण कुछ समस्याओं के निराकरण में विलंब हो रहा है, लेकिन प्रखंड प्रशासन लिट्टीपाड़ा क्षेत्र के सभी गांव के विकास के लिए तत्पर है।


