व्रत करें पर‌‌‌ ‌शुगर लो न हो,इसका रखें ध्यान:डॉक्टर बोले; यह हाई से ज्यादा खतरनाक; बच्चे, गर्भवती, बुजुर्ग व्रत करने से बचें

इंदौर में इन दिनों नवरात्रि उत्सव की धूम शुरू हो गई। इसके साथ ही मां अंबे के भक्तों का उपवास का दौर शुरू हो गया। इसमें बच्चे, युवा, महिलाएं और बुजुर्ग तक शामिल हैं। परंपरा के अनुसार सालों से व्रत का सिलसिला चल रहा है, लेकिन अब स्थितियां अलग हैं। चूंकि बीतें सालों में ब्लड प्रेशर, डायबिटीज सहित अन्य बीमारियों के मरीज भी बढ़े हैं। ऐसे में व्रतधारियों को मेडिकल के नजरिए से इन पूरे नौ दिनों तक क्या-क्या ध्यान रखना चाहिए, किन-किन लोगों को व्रत नहीं करना चाहिए, इसे लेकर ‘दैनिक भास्कर’ ने सीनियर डॉ. संदीप जुल्का (Endocrinologist) और डायटिशियन शिवानी खंडेलवाल से बात की। इस पर दोनों ने व्रतधारियों को लेकर अपने सुझाव देने के साथ-साथ मेडिकल संबंधी हिदायतें भी दी। दरअसल नवरात्रि पर मां अम्बे की साधना में भक्त तरह-तरह के कड़े उपवास कर रहे हैं। कुछ तो दिनभर में सिर्फ एक बार दूध, चाय ही लेते हैं। कुछ भक्त पूरे नौ दिन एक समय का उपवास तो कुछ और अलग-अलग तरह के उपवास करते हैं। कुल मिलाकर फलाहार को छोड़कर कुछ और ग्रहण नहीं करते। ऐसे में इनकी सेहत पर क्या असर पड़ सकता है और किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, यह बहुत जरूरी है। उपवास धार्मिक, श्रद्धा और सेहत के लिहाज से कितना फायदेमंद है?
उपवास करना अच्छी बात है। इसे कहते हैं रिटर्निंग बैक टू रूट यानि अपनी संस्कृति या अपनी धरोहर को पहचानना। हालांकि कुछ लोगों के लिए उपवास वर्जित होता है खासकर डायबिटीज मरीजों के लिए। वे मरीज जो इंसुलिन पर हैं या गर्भवती महिलाएं जिन्हें डायबिटीज हैं या बच्चे जो इंसुलिन पर हैं उन्हें उपवास नहीं रखना चाहिए। 18-19 साल के भी युवा डायबिटीज मरीज उपवास न रखें। वे बुजुर्ग मरीज जिन्हें सल्फ्यूनिक यूरियाज दवाई लेते हैं उन्हें उपवास नहीं रखना है। वे बुजुर्ग जिनकी किडनी में तकलीफ है वे भी उपवास नहीं करें। जिनका क्रिटनिन बढ़ा है वे भी उपवास नहीं करें। युवा जिन्हें डायबिटीज प्रारंभिक स्टेज पर है वे एक समय फलाहार खाकर उपवास रख सकते हैं। जिन्हें डायबिटीज नहीं, उनके लिए क्या फायदेमंद होता है?
प्री डायबिटीक लोग जिन्हें डायबिटीज कगार पर है उनके लिए उपवास वरदान है। कुछ दवाइयां जिन्हें मेटफॉरमिन कहते हैं या जिन्हें डीपीपी फॉर ह्यूयमिटस इन दवाइयों वाले मरीज बेझिझक उपवास रख सकते हैं। बशर्तें हाइड्रेशन अच्छा रखें, पानी पीते रहे, कुछ अच्छे जैसे नट्स के तहत अखरोट, बादाम आदि खाते रहे, फल खाएं छिलके के साथ लेकिन ज्यूस न लें। यदि इन बातों का ध्यान रखेंगे तो धार्मिक और मेडिकल दृष्टि से त्योहार बहुत अच्छे से मनेगा। शुगर कम होना ज्यादा खतरनाक है। अगर किसी की शुगर कम होती है तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। यदि संबंधित मुंह से कुछ ले पाते हैं तो उस दौरान कुछ मीठा दे दें। यदि कोई बेहोश हो तो मसूड़ों पर शहद या जैम लगा दें।
अधिकांश लोग डायबिटिक हैं में वे खुद क्या और कैसे ध्यान रखें?
डायबिटीज वालों को खुद ध्यान रखना है कि वे इंसुलिन पर हैं या दवाइयों पर। शुगर लेवल मैनेज करना जरूरी है, क्योंकि शुगर कम भी हो सकती है। हायपोग्लाइसोमिया या शुगर बढ़ भी सकती है। दिनभर कुछ नहीं खाने से डिहाइड्रेशन भी हो सकता है क्योंकि दिनभर कुछ नहीं खाया तो प्यास भी नहीं लगेगी। यह सिर्फ डायबिटीज मरीजों के लिए नहीं बल्कि सभी व्रत करने वाले लोगों को ध्यान रखना चाहिए। डायबिटीज मरीज को अगर हाई ब्लड प्रेशर है तो उसे भी मैनेज करना जरूरी है। अगर शुगर नियंत्रित नहीं हुई तो ब्लड प्रेशर भी कम ज्यादा हो सकता है। इसके लिए संतुलित फलाहार जरूरी है। इसमें दूध भी अच्छा है।
धर्म-अध्यात्म और भक्ति तो ऐसे में कैसे संतुलन हो? फलाहार में भी कई आइटम हैं। ये सेहत के लिए कैसे हैं?
व्रत में सबसे ज्यादातर साबूदाना (खिचड़ी) का उपयोग होता है, लेकिन वह तुरंत शुगर बढ़ाता है। साबूदाने का मिक्चर, बड़े तो और भी शुगर बढ़ाते हैं, क्योंकि इनमें आलू, दाने, तेल आदि से बने आइटम भी रहते हैं। तली हुई खाद्य पदार्थों से शुगर बढ़ती है जबकि साबूदाना से पहले ही स्टार्च बढ़ जाता है। ऐसे में ब्लड प्रेशर भी बार-बार कम-ज्यादा होता रहेगा। बेहतर है कि इसका सेवन कम करें। इसके बदले अन्य फलाहार लें जिसमें शुगर कम हो। ऐसे में कोशिश करें उन्हीं का सेवन करें जो शुगर लेवल को तुरंत न बढ़ाएं। इसमें राजगीरा, कुट्‌टू, सिंघाड़ा का आटा, कद्दू, लोक की सब्जियां आदि का सेवन करें। ऐसे ही बादाम, अखरोट, सिंके हुए मखाने आदि खाएं। फलों में सेवफल, पपीता, अमरूद, अनार आदि खाएं। फलों का ज्यूस न लें। जूस से फलों के फाइबर खत्म हो जाते हैं और शुगर लेवल को बढ़ा देते हैं। फलाहारी आटे के पकौड़े, पुरियां खाने से बचे बल्कि उसकी रोटियां, चीले बनाकर खा सकते हैं। उसमें कद्दू, पनीर आदि का उपयोग कर सेवन कर सकते हैं। इससे संतुलित आहार रहता है। काफी लंबे समय तक व्रत रखने से शुगर बढ़ती है फिर आप भरपेट खाएंगे तो शुगर का लेवल तुरंत बढ़ जाएगा। ऐसे में बीच-बीच में से कुछ फलाहारी आहार लेते रहे ताकि एक बार में खाने से शुगर लेवल नहीं बढ़ेगा और ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहेगा।
ब्लड प्रेशर के मरीजों को क्या-क्या ध्यान रखना चाहिए?
हार्ट मरीजों को शुगर और ब्लड प्रेशर का खास ध्यान रखना चाहिए। व्रत में तली हुई फलाहारी खाद्य पदार्थ नहीं ऐसे पदार्थों का सेवन करे जो शरीर को स्वस्थ रखें, शुद्ध करें न कि अंदर से अशुद्ध। बच्चों, गर्भवती, बीमार और बुजुर्गों को व्रत नहीं रखना चाहिए या फिर संभलकर व्रत करें क्योंकि उससे उनके शरीर में पानी की कमी होकर तबीयत बिगड़ सकती है।
फिर भी उपवास रखने से क्या फायदा है?
व्रत करने से शरीर के टॉक्सिन खत्म हो जाते हैं, लेकिन जरूरी है कि उस दौरान हम जो फलाहारी आहार लें तो ध्यान रखें कि उनसे टॉक्सिन न बढ़े। ऐसे में व्रत का भी कोई मतलब नहीं रहेगा।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *