दलमा के घने जंगलों में दुर्लभ तितलियों की खोज हुई है, जो बारिश में भी उड़ने में सक्षम हैं। “वॉटर स्नो फ्लैट” और “गोल्डन एंजल” नामक इन तितलियों की खोज पटमदा वन क्षेत्र के प्रभारी वनपाल राजा घोष ने की है। सामान्यतः अन्य तितलियां बारिश के मौसम में कम सक्रिय रहती हैं, लेकिन ये प्रजातियां सहज रूप से उड़ान भरती हैं। ये तितलियां अपने पंखों को सपाट या आंशिक रूप से फैलाकर उड़ती और विश्राम करती हैं, जबकि अन्य तितलियों की तरह इनके पंख आगे-पीछे नहीं चलते। इनका शरीर मध्यम आकार का मोटा और रोएंदार होता है। सिर पर हुक जैसे एंटीना होते हैं, जो इन्हें विशिष्ट बनाते हैं। दलमा वन क्षेत्र में लगभग 200 से अधिक तितली की प्रजातियां पाई जाती हैं। वन विभाग ने तितलियों की संख्या बढ़ाने के उद्देश्य से हिरण पार्क के सामने तितली गार्डन का निर्माण शुरू किया है। इसमें तितलियों का प्रजनन कराया जाएगा और बाद में इन्हें दलमा जंगल में छोड़ा जाएगा। तितलियों की विशेषताएं
वॉटर स्नो फ्लैट: भारत के अलावा श्रीलंका और म्यांमार में पाई जाती हैं। नदियां, झरने और नम जगहों में इनका विचरण अधिक होता है। यह हेस्परिडे परिवार की टैगियाडेस जीनस की प्रजाति है।
गोल्डन एंजल: उत्तरी भारत में देखी जाती हैं। इन्हें अंगद नाम से भी जाना जाता है और ये अपने मूल स्थान से जल्दी विस्थापित नहीं होतीं। उत्तराखंड के भीमताल में इनके अनुसंधान केंद्र हैं।
अन्य प्रजातियां जो बारिश में उड़ान भरती हैं: कॉमन वांडरर, कॉमन क्रो, ग्रास येलो। छांव में भी रहती हैं सक्रिय
प्रभारी वनपाल राजा घोष ने बताया कि ज्यादातर तितलियां सूर्य के प्रकाश की ओर आकर्षित होती हैं, वहीं वाटर स्नो फ्लैट और गोल्डन एंजल तितलियां छांव में भी सक्रिय रहती हैं। यह व्यवहार इन्हें अन्य तितली प्रजातियों से अलग बनाता है। इनके गहरे भूरे रंग के पंखों पर हल्के या सफेद रंग के धब्बे होते हैं, जो कभी-कभी स्पष्ट दिखाई देते हैं। इनके पंखों में विशेष शिराएं होती हैं जो उनके कोणीय आकार को दर्शाती हैं। दलमा जंगल में वाटर स्नो फ्लैट और गोल्डन एंजल जैसी तितलियों की खोज न केवल पर्यावरणविदों के लिए उत्साहजनक है, बल्कि यह संरक्षण के महत्व को भी दर्शाती है।


