भास्कर न्यूज | अमृतसर पंजाब प्रदेश व्यापार मंडल के अध्यक्ष प्यारे लाल सेठ एवं महासचिव समीर जैन ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा जीएसटी दरों में किए गए बदलाव निश्चित रूप से खपत और उत्पादन बढ़ाने वाला कदम हैं, लेकिन इनको लागू करने में गंभीर खामियां हैं। उन्होंने कहा कि बदलावों का अधिक असर फार्मास्यूटिकल उद्योग, कॉरुगेटेड बॉक्स उद्योग, स्टेशनरी उद्योग जैसे पेंसिल, शार्पनर, रबर, जिन्हें शून्य कर स्लैब में रखा गया है और स्टील यूटेंसिल्स उद्योग पर पड़ेगा। इन सेक्टरों को कच्चा माल प्रायः 18% टैक्स पर खरीदना पड़ता है, जबकि तैयार उत्पाद पर केवल 5% या शून्य प्रतिशत कर लगाया गया है। इस असमानता के कारण व्यापारियों और उद्योगों को इनपुट टैक्स क्रेडिट एडजस्ट करने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा और भुगतान प्रणाली में डबल ब्लॉकेज की स्थिति बन जाएगी। प्यारे लाल सेठ ने कहा कि शॉल उद्योग को ‘मेड-अप कैटेगरी’ में शामिल करना उचित नहीं है क्योंकि इसमें कटाई नहीं होती। सभी शॉल, उनकी कीमत चाहे जो भी हो, को 5% जीएसटी स्लैब में रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि शॉल पंजाब और उत्तरी भारत का परंपरागत व रोजगार देने वाला उद्योग है। अलग-अलग टैक्स स्लैब की जटिलता व्यापारियों के लिए बोझिल साबित हो रही है। यदि शॉल पर समान 5% कर लागू किया जाए, तो व्यापार सुगम होगा, कारीगरों को राहत मिलेगी और ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस को बढ़ावा मिलेगा। कुछ सेवाओं के क्षेत्र में भी इसी प्रकार की दिक्कतें खड़ी की गई हैं। सर्विस इंडस्ट्री पर 5% जीएसटी लागू किया गया है, लेकिन इनपुट टैक्स क्रेडिट को समाप्त कर दिया गया है। जैन ने कहा कि सरकार को चाहिए कि वह व्यापारियों और उद्योगों के व्यावहारिक पक्ष को ध्यान में रखकर निर्णय ले।


