अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को अधिकार देने के लिए पेसा कानून लागू करने की मांग को लेकर दायर याचिका पर बुधवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर की अदालत ने पेसा कानून लागू न होने पर कड़ी नाराजगी जताई। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने बालू घाटों और लघु खनिजों के आवंटन से रोक हटाने की मांग को लेकर हस्तक्षेप याचिका दाखिल की। इस पर कोर्ट ने कहा कि हम केवल आदेश देते रहेंगे और सरकार सुनती रहेगी, ऐसा नहीं चलेगा। जब तक नियमावली अधिसूचित नहीं होती, तब तक लघु खनिजों के आवंटन से रोक नहीं हटेगी। अदालत ने राज्य सरकार से पूछा कि पेसा एक्ट 1996 के तहत अब तक नियमों को क्यों अधिसूचित नहीं किया गया। जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई की गई। अदालत ने कहा कि क्यों न इसे अदालत के आदेश की अवमानना माना जाए। महाधिवक्ता बोले-नियमावली का ड्राफ्ट तैयार, कैबिनेट को भेजा है सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि पेसा कानून की नियमावली का ड्राफ्ट कैबिनेट को भेजा जा चुका है। उन्होंने अदालत से एक माह का समय मांगा। याचिकाकर्ता आदिवासी बुद्धिजीवी मंच की ओर से अधिवक्ता अभिषेक राय और ज्ञानंत सिंह ने इसका विरोध किया। उन्होंने कहा कि ऐसे ड्राफ्ट पहले भी कई बार विभिन्न स्तर पर भेजे गए हैं। इसके बावजूद आज तक नियम लागू नहीं हुआ। इस पर अदालत ने कहा कि प्रक्रिया से कोई मतलब नहीं है, आदेश का पालन होना चाहिए।


