सारंडा वन क्षेत्र के 575.19 वर्ग किमी क्षेत्र को वन्य जीव अभयारण्य घोषित करने के लिए सरकार ने मंत्रियों के समूह का गठन किया है। यह समूह वहां की जनजातियों की आर्थिक- सामाजिक स्थिति और वहां चल रही आर्थिक गतिविधियों पर मंत्रिमंडल को रिपोर्ट सोंपेगी। उसके आधार पर ही फैसला लिया जाएगा। यह फैसला मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में बुधवार को हुई बैठक में लिया गया। मंत्रियों के इस समूह में सभी स्टेक होल्डर विभागों के मंत्री भी शामिल होंगे। कैबिनेट सचिव वंदना दादेल ने बताया कि सारंडा को अभयारण्य घोषित करने को लेकर बैठक में लंबी चर्चा हुई। क्षेत्र के सभी स्टेक होल्डर विभागों के सचिवों की राय ली गई। इसके बाद यह फैसला लिया गया। बैठक में कुल 27 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। सारंडा को अभयारण्य घोषित करने पर हो रही देरी पर सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में झारखंड सरकार को कड़ी फटकार लगाई थी। मुख्य सचिव को आठ अक्टूबर को कोर्ट में पेश होने को कहा था। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा था कि इन निर्देशों का पालन न होने पर अधिकारियों को जेल भी भेजा जा सकता है। कोर्ट ने राज्य सरकार पर अवमानना का आरोप भी लगाया था। चीफ जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा था-ऐसा प्रतीत होता है कि झारखंड सरकार न केवल टालमटोल कर रही है, बल्कि कोर्ट के साथ छल भी कर रही है। सरकार सुप्रीम कोर्ट के 29 अप्रैल के आदेश की स्पष्ट अवमानना कर रही है। -पेज 4 भी पढ़ें मंडल डैम के डूब क्षेत्र के 780 परिवारों को 15 लाख रु.मिलेंगे
शहीद नीलांबर पीतांबर उत्तर कोयल जलाशय परियोजना(मंडल डैम) के डूब क्षेत्र में रहने वाले सात गावों के 780 परिवारों को पुनर्वासित करने की योजना को भी कैबिनेट ने मंजूरी दे दी। इस योजना के तहत प्रभावित परिवार एक मुश्त 15 लाख रुपए लेकर पुनर्वासित हो सकते हैं। वैसे वन विभाग के माध्यम से पुनर्वासित होने पर 15 लाख रुपए की 35% राशि कृषि योग्य 2 हेक्टेयर भूमि खरीदने के लिए, 30% राशि खतियान से संबंधित सेटलमेंट पैकेज के लिए, 20% राशि गृह निर्माण के लिए एवं 10% राशि सामुदायिक सुविधाओं के लिए दी जाएगी। 7 विभागों ने नहीं दिया मंतव्य, पेसा कानून पर चर्चा ही नहीं पंचायती राज विभाग ने पेसा नियमावली कैबिनेट को भेजी थी, लेकिन इस पर चर्चा नहीं हो सकी। पेसा नियमावली को लेकर पंचायती राज विभाग ने कुल 17 विभागों से मंतव्य मांगा गया था। बताया जा रहा है कि इसमें से 10 विभागों ने अपना मंतव्य भेजा था। सात विभागों ने अब तक अपना मंतव्य नहीं दिया था। इसलिए इसे कैबिनेट में रखने को लेकर सहमति नहीं बनी। यही वजह रही कि कैबिनेट को भेजे जाने के बावजूद पेशा नियमावली पर चर्चा नहीं हुई। अब सातों विभाग जब अपना मंतव्य दे देंगे तब इसे फिर से कैबिनेट को भेजा जाएगा। इसके बाद ही इस पर चर्चा होगी आैर यह कैबिनेट से पारित कराया जा सकेगा। पेसा कानून को लेकर इस साल के प्रारंभ से ही पंचायती राज विभाग ने इसके लिए प्रयास आरंभ किया था। विभाग द्वारा आम लोगों का सुझाव आैर आपत्ति मांगी थी। इसके बाद इस विषय पर कार्यशाला का आयोजन भी विभागीय स्तर पर किया गया था। राज्य सरकार के टैक्स का 4% निकायों और पंचायतों को मिलेगाकैबिनेट ने राज्य सरकार के टैक्स की चार फीसदी राशि निकायों और पंचायतों को देने का फैसला लिया है। इस राशि में 40 फीसदी हिस्सा नगर निकायों को और 60 फीसदी पंचायतों को दी जाएगी। चार फीसदी राशि की गणना पिछले वित्तीय वर्ष की राजस्व प्राप्ति के आधार पर होगी। ग्रामीण विकास विभाग ने इसके लिए काफी मशक्कत की थी। झारखंड कैबिनेट की बैठक में 27 प्रस्तावों को दी गई मंजूरी
मंत्रियों का समूह प्रस्तावित अभयारण्य क्षेत्र में आर्थिक-सामाजिक स्थिति का फील्ड असेस्मेंट कर आकलन करेगा कि अभयारण्य घोषित होने से इलाके पर क्या प्रभाव पड़ेगा। खनन क्षेत्र पर क्या प्रभाव होगा, क्योंकि वहां करीब चार बिलियन टन लौह अयस्क का भंडार है।
उस क्षेत्र में वर्तमान में क्या-क्या गतिविधियां चल रही हैं, जैसे खनन, अवैध कटाई, अवैध बस्ती, अवैध खेती आदि। वन्य जीव और जैव विविधता की क्या स्थिति है। कौन-कौन सी प्रजातियां हैं, उनकी आबादी कितनी है और उस पर खतरा क्या है। खनन क्षेत्रों की पहचान एवं उनके दायरे क्या हैं। खनन से होने वाले राजस्व, रोजगार, राज्य एवं केंद्र सरकार को होने वाली आय की समीक्षा भी होगी।
अभयारण्य घोषित होने पर इको सेन्सिटिव जोन की स्थिति क्या होगी। यह कितनी दूरी तक बनाया जाएगा, किन गतिविधियों पर प्रतिबंध होंगे।
वन ग्रामों में रहने वाले लोग, उनके अधिकार, उनकी आजीविका पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
आदिवासी समुदायों का सामाजिक-आर्थिक प्रभाव, भूमि अधिकारों पर क्या असर होगा। कुछ बस्तियां हटाई गई तो उनके पुनर्वास और मुआवजे की क्या व्यवस्था होगी।


