कोरबा में बाढ़, क्लोरीन गैस रिसाव पर मॉक ड्रिल:आपदा से बचाव के तरीके बताए गए, कई विभाग शामिल

कोरबा में जलजनित आपदा और क्लोरीन गैस रिसाव से निपटने के लिए दो अलग-अलग मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। ये अभ्यास कटघोरा स्थित राधासागर तालाब और कोहड़िया के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में किए गए, जिनका उद्देश्य नागरिकों को आपदा के समय जान बचाने के तरीके सिखाना था। राधासागर तालाब में आयोजित मॉक ड्रिल में भारी वर्षा के कारण जलस्तर बढ़ने और लोगों के पानी में फंसने की काल्पनिक स्थिति बनाई गई। बचाव दलों ने लाइफ जैकेट, रस्सियों और नाव की मदद से तालाब में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। प्रशिक्षित गोताखोरों ने बचाई कई ज़िंदगियां प्रशिक्षित गोताखोरों और रेस्क्यू टीम ने फंसे व्यक्तियों की पहचान कर उन्हें किनारे तक पहुंचाया। मेडिकल टीम ने मौके पर ही स्वास्थ्य परीक्षण किया। डूबने की स्थिति में कृत्रिम श्वसन (सीपीआर), ऑक्सीजन सपोर्ट और प्राथमिक दवाओं का प्रदर्शन किया गया। गंभीर मरीजों को एम्बुलेंस से अस्पताल ले जाने का भी अभ्यास किया गया। इसी क्रम में कोहड़िया स्थित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में क्लोरीन गैस रिसाव पर आधारित मॉक ड्रिल हुई। क्लोरीन गैस का उपयोग पेयजल शोधन में होता है, लेकिन इसका अधिक रिसाव मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। अभ्यास में संयंत्र में अचानक क्लोरीन गैस रिसाव की स्थिति निर्मित की गई। अलार्म बजते ही आपदा प्रबंधन टीम ने तेजी से की कार्रवाई अलार्म बजते ही आपदा प्रबंधन टीम ने कर्मचारियों और आसपास मौजूद लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। गैस रिसाव को नियंत्रित करने के लिए सिलेंडर बंद करने, वाटर स्प्रे कर प्रभावित क्षेत्र को सील करने और गैस को फैलने से रोकने के उपायों का प्रदर्शन किया गया। मेडिकल टीम ने गैस से प्रभावित लोगों का किया प्राथमिक उपचार मेडिकल टीम ने गैस से प्रभावित व्यक्तियों का प्राथमिक उपचार किया। उन्हें ताजी हवा में लाया गया, आंखों और त्वचा को साफ पानी से धोने की प्रक्रिया दिखाई गई तथा सांस लेने में कठिनाई होने पर ऑक्सीजन सपोर्ट प्रदान किया गया। इस दौरान प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस बल, एनडीआरएफ, स्वास्थ्य विभाग, नगर पालिका, अग्निशमन दल तथा स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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