निर्माणाधीन गर्ल्स हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरा बच्चा:प्रिंसिपल डॉ. पुकार ने सर्जन टीम संग ऑपरेशन कर जान बचाई

चूरू मेडिकल कॉलेज में निर्माणाधीन गर्ल्स हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद एक सात वर्षीय बच्चा घायल हो गया। मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. एमएम पुकार के नेतृत्व में सर्जन टीम ने देर रात तत्काल ऑपरेशन कर बच्चे को नया जीवन दिया। बच्चे की हालत अब स्थिर बताई जा रही है। यह घटना शुक्रवार देर शाम हुई। उत्तर प्रदेश के मजदूर दंपती गर्ल्स हॉस्टल की चौथी मंजिल पर काम कर रहे थे, तभी उनका सात वर्षीय बेटा शिवांश खेलते हुए अचानक नीचे गिर गया। हादसे में बच्चे के सिर, पेट, तिल्ली और लिवर में गंभीर चोटें आईं। घायल बच्चे को तुरंत इमरजेंसी वार्ड ले जाया गया। प्रारंभिक उपचार के बाद उसे हायर सेंटर रेफर करने की तैयारी थी। इसी दौरान अस्पताल के उप अधीक्षक डॉ. इदरीश खान को सूचना मिली और वे वार्ड पहुंचे। उन्होंने बच्चे की स्थिति का आकलन किया और तत्काल प्रिंसिपल डॉ. एमएम पुकार को फोन पर जानकारी दी। डॉ. पुकार तुरंत अस्पताल पहुंचे और संबंधित डॉक्टरों से बच्चे की हालत जानी। उन्होंने तत्काल बच्चे का सीटी स्कैन करवाया, जिसमें सामने आया कि उसके पेट में तिल्ली और लिवर में गंभीर चोटें थीं। डॉक्टरों का मानना था कि यदि बच्चे को रेफर किया जाता तो रास्ते में उसकी जान को खतरा हो सकता था। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉ. पुकार ने देर रात ही सर्जन डॉक्टरों की एक टीम बनाई और खुद ऑपरेशन कर बच्चे की जान बचाई। फिलहाल, सात वर्षीय शिवांश पीकू वार्ड में भर्ती है, जहां डॉक्टरों की देखरेख में उसकी तबीयत में लगातार सुधार हो रहा है। डॉ. पुकार ने बताया कि मजदूर दंपती का बेटा शिवांश खेलते हुए नीचे गिर गया था। डॉ. इदरीश खान ने उन्हें बच्चे की गंभीर हालत और हायर सेंटर रेफर किए जाने की जानकारी दी थी, जिसके बाद उन्होंने तुरंत कार्रवाई करते हुए बच्चे का सीटी स्कैन और ब्लड टेस्ट करवाकर ऑपरेशन का निर्णय लिया। सीटी स्केन में सामने आया कि बच्चे की तिल्ली फट गयी थी। इसके अलावा लिवर में भी ब्लड जम गया था। बच्चा रेफर करने की स्थिति में नहीं था। इसलिए तुरन्त डॉ. गजानन्द, डॉ. मिनाक्षी, डॉ. वेदिका,डॉ. मिनीक्षी, डॉ.अनिता व नर्सिंग ऑफिसर राहुल शर्मा व अंकित मील की टीम बनाई गई। करीब 35 से 45 मिनट तक चले ऑपरेशन के बाद बच्चे की तिल्ली को बाहर निकाला गया। ऑपरेशन के बाद अब बच्चे की हालत में सुधार हैं। अगर समय पर बच्चे का ऑपरेशन नहीं किया जाता तो उसकी जान को खतरा बन जाता। इसलिए अस्पताल की सर्जन डॉक्टरों की टीम ने टीमवर्क काम कर बच्चे की जान बचाई हैं।

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