धमतरी के बिलाई माता मंदिर में 2397 ज्योत प्रज्ज्वलित:अमेरिका-कनाडा और इंग्लैंड-पोलैंड से भी जलवाए कलश, 35 साल बाद बावली का जीर्णोद्धार

धमतरी के बिलाई माता मंदिर में शारदीय नवरात्रि के अवसर पर 2397 घी के ज्योत प्रज्ज्वलित किए गए हैं। यह मंदिर छत्तीसगढ़ की आराध्य देवी को समर्पित है। इस साल मंदिर परिसर में स्थित बावली (सीढ़ीदार कुआं) का 35 साल बाद जीर्णोद्धार किया गया है, जो भक्तों के लिए एक प्रमुख आकर्षण का केंद्र बन गया है। नवरात्रि पर्व के दौरान देश-विदेश से बड़ी संख्या में भक्त माता के दर्शन और अपनी मनोकामना ज्योत प्रज्ज्वलित कराने के लिए धमतरी पहुंच रहे हैं। मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष आनंद पवार ने बताया कि अमेरिका, कनाडा, पोलैंड और इंग्लैंड जैसे देशों से भी भक्तों ने ज्योत कलश स्थापित करवाए हैं। मंदिर में केवल घी के ज्योत जलाए जाते हैं और यह मान्यता है कि यहां मांगी गई हर मुराद पूरी होती है। 5 फीट का शंख स्थापित बिलाई माता मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष आनंद पवार ने बताया कि मंदिर परिसर की बावली को लगभग 35-36 साल पहले बंद कर दिया गया था। जिसे अब पुनर्जीवित कर सुंदर बनाया गया है। बावली के जल वाले स्थान पर लगभग 5 फीट का एक शंख स्थापित किया गया है, जो विशेष रूप से आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। नवरात्रि पर्व के दौरान मंदिर परिसर में कई धार्मिक आयोजनों का सिलसिला जारी है। बावली को आकर्षण का केंद्र बनाया गया दूर दराज से पहुंचे भक्तों ने कहा कि, इस बार का माहौल भक्ति पूर्ण है। भक्ति के प्रति रुझान भी देखने को मिल रहा है। पहले की तुलना में इस बार बहुत ज्यादा भक्ति बढ़ गई है। मंदिर में आने का तरीका भी बदल चुका है। इस बार बावली को आकर्षण का केंद्र बनाया गया है। जिसमें समुचित रूप से शंख को स्थापित कर बावली के ऊपर ग्लास लगाया गया है। जिसमें लोग चल भी सकते हैं, जो कि देखते ही बन रही है। शाम 4 बजे हवन का कार्यक्रम पंडितों ने बताया कि, बिलाई माता मंदिर में माता का महिमा अपरंपार है। दिनों दिन भक्तों की संख्या बढ़ती जा रही है। बताया गया कि बारिश के चलते भक्तगण नहीं आ पा रहे थे। लेकिन अब मंदिरों में भीड़ लगना शुरू हो चुका है। अब श्रद्धालु आसानी से दर्शन कर पा रहे हैं। इस वर्ष नवरात्रि 10 दोनों का है। 30 सितंबर अष्टमी के दिन बिलाई माता मंदिर में शाम 4 बजे हवन का कार्यक्रम किया जाएगा।

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