लुधियाना| श्री गढ़वाली धर्मशाला प्रेम विहार टिब्बा रोड में संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में कथा व्यास बाल संत मनोज दास जी महाराज मिथिला धाम वाले ने मंगलवार को सुदामा चरित्र का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि सुदामा भगवान कृष्ण के परम मित्र थे। भिक्षा मांगकर अपने परिवार का पालन पोषण करते थे। गरीबी के बाद भी हमेशा भगवान के ध्यान में मग्न रहते थे। उनकी पत्नी सुशीला सुदामा जी से बार-बार आग्रह करती कि आपके मित्र तो द्वारकाधीश हैं उनसे जाकर मिलो शायद वह हमारी मदद कर दें। पत्नी के कहने पर सुदामा द्वारका पहुंचते हैं और जब द्वारपाल भगवान कृष्ण को बताते हैं कि सुदामा नाम का ब्राम्हण आया है। तो श्रीकृष्ण यह सुनकर नंगे पैर दौड़कर आते हैं और अपने मित्र को गले से लगा लेते। उनकी दीन दशा देखकर कृष्ण के आंखों से अश्रुओं की धारा प्रवाहित होने लगती है। सिंघासन पर बैठाकर कृष्ण जी सुदामा के चरण अपने अश्रुओं से धोते हैं। इस अवसर पर विकास तिवारी, मनोज शुक्ला, अनुज पांडे, सुनीता शर्मा, पूनम रानी, लक्ष्मी आदि मौजूद रहे।


