मनाली घाटी की अधिष्ठात्री देवी हिडिंबा का रथ आज बुधवार को कुल्लू दशहरा महोत्सव के लिए मनाली से रवाना हुआ। यह रथ कुल्लू दशहरा की परंपरा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। देवी हिडिंबा का रथ नवमी के दिन मनाली से कुल्लू के लिए प्रस्थान करता है। इस दौरान लोनिवि विश्राम गृह मनाली में देवी हिडिंबा की पूजा अर्चना की जाती है और सभी श्रद्धालुओं के नाश्ते का आयोजन होता है। देवी हिडिंबा के कुल्लू पहुंचने के बाद ही भगवान रघुनाथ की ऐतिहासिक रथ यात्रा शुरू होती है। यह यात्रा कुल्लू दशहरे का मुख्य आकर्षण है, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं। श्रद्धालु देवी हिडिंबा माता का रथ उठाकर पैदल शाम तक कुल्लू पहुंचते है। इस दौरान रास्ते में जगह जगह रोककर श्रद्धालुओं द्वारा देवी हिडिंबा की पूजा अर्चना की जाती है। ये है कुल्लू दशहरे की परम्परा… देवी हिडिंबा के पहुंचते ही शुरू होती है रथ यात्रा भगवान रघुनाथ को राजमहल से पालकी में रथ ग्राउंड तक लाया जाता है और सुसज्जित रथ पर सवार करके रथ यात्रा की तैयारी की जाती है। माता हिडिंबा के पहुंचते ही रथ यात्रा के साथ ऐतिहासिक कुल्लू दशहरा का शुभारंभ होता है।


