देशभर में माहेश्वरी समाज युवाओं की शादी की उम्र 5 साल कम करने की दिशा में प्रयास करेगा। करियर के कारण युवा देर से शादी कर रहे हैं, जिस कारण वे एक ही बच्चे पर सीमित हो रहे। इससे समाज का री-जनरेशन रेट कम हो रहा है। 5 सालों में आया यह परिवर्तन चिंता का विषय है। पिछले दिनों सूरत में अखिल भारतवर्षीय माहेश्वरी समाज की बैठक में इस मुद्दे को गंभीरता से उठाते हुए कई निर्णय लिए गए। महासभा का मानना है, वर्तमान में समाज की युवतियां 26 से 29 और युवक 27 से 30 वर्ष की आयु में शादी करते हैं। इससे समाज का री-जनरेशन रेट (प्रति महिला के बच्चों की संख्या) 2.2 से घटकर 1.8 हो गया। इस पर गंभीरता से विचार नहीं किया तो अगले 50 सालों में समाज की जनसंख्या काफी कम हो जाएगी। तय उम्र में विवाह के लिए किया प्रोत्साहित महासभा के मीडिया प्रभारी रामस्वरूप मूंदड़ा ने बताया कि लड़कियों को 21 और लड़कों को 23 वर्ष की उम्र में विवाह करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस उम्र में विवाह करने वाले जोड़े को 1 लाख की एफडी व तीसरी संतान होने पर 51 हजार रुपए की एफडी की जाएगी। बेटी ब्याहो, बहू पढ़ाओ का चला रहे अभियान अखिल भारतवर्षीय महेश्वरी महासभा के उपसभापति मध्यांचल विजय राठी कहते हैं, महासभा और राष्ट्रीय महिला संगठन ने ‘बेटी ब्याहो और बहू पढ़ाओ’ अभियान चलाया है। उद्देश्य है माता-पिता लड़कियों की शादी तय उम्र में कर दें और ससुराल पक्ष पढ़ाई की जिम्मेदारी संभाले। 2 लाख से ज्यादा परिवारों का सर्वेक्षण समाज के 2 लाख से अधिक परिवारों पर किए सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण में यह आंकड़े सामने आए हैं। सभापति संदीप काबरा ने बताया री-जनरेशन रेट कम और जेंडर गैप बढ़ रहा है। हम युवतियों को 21 व युवकों को 23 वर्ष में विवाह करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। यह होता है री-जनरेशन रेट प्रत्येक महिला औसत 2.1 बच्चों को जन्म देती है, जिससे जनसंख्या स्थिर रहती है। कुल जनसंख्या दर के इससे कम होने का अर्थ जन्मदर कम होना है।


