देश-दुनिया में ज्योर्तिलिंग की वजह से पहचान रखने वाला ओंकारेश्वर अब दुनिया के सबसे बड़े फ्लोटिंग (तैरने वाले) पावर प्लांट के रूप में ऊर्जा की नई कहानी लिख रहा है। अब तक चीन भारत से सिलिकॉन वेफर और अन्य उपकरण खरीदकर भारत को ही महंगे दाम में सोलर पैनल और बैटरी बेचता रहा है, लेकिन अब भारत ने चीन से ही सोलर प्लेट खरीदकर फ्लोटिंग सोलर पावर में उसी काे पछाड़ दिया है। 12 साल में मध्य प्रदेश में सोलर एनर्जी 3308 मेगावाट तक पहुंच गई है। ये कुल बिजली उत्पादन का करीब 10 फीसदी है। यानी प्रदेश के 18 लाख घरों और 90 लाख लोगों तक सूरज की ऊर्जा से चलने वाली बिजली पहुंच रही है। दुनिया के सबसे बड़े सोलर फ्लोटिंग पावर प्लांट से पढ़िए ये रिपोर्ट- इंदौर से करीब 80 किलोमीटर दूर है ओंकारेश्वर। यहां नर्मदा नदी के बैकवॉटर में एखंड, केलवा खुर्द और इंधावड़ी गांव के पास तैरता हुआ सोलर पावर प्लांट दूर से नजर आ रहा है। दैनिक भास्कर की टीम मोटर बोट में बैठकर 20 मिनट की यात्रा कर प्लांट तक पहुंची। इस सोलर पार्क प्रोजेक्ट की नींव 2019 में रखी गई थी। 2024 में लगभग 5 साल बाद मध्य प्रदेश सरकार ने 600 मेगावाट की फ्लोटिंग सौर ऊर्जा परियोजना के पहले चरण का काम पूरा कर लिया है। इससे 278 मेगावाट बिजली का उत्पादन 25 दिसंबर से चालू हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस परियोजना का उद्घाटन किया। योजना के पहले चरण में तीन कंपनियां AMP एनर्जी इंडिया 100 मेगावाट, SJVN (सतलुज जल विद्युत निगम) 90 मेगावाट और NHDC (नर्मदा हाइड्रोइलेक्ट्रिकल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन) 88 मेगावाट बिजली का उत्पादन कर रही हैं, जो मध्य प्रदेश सरकार को बिजली दे रही हैं। ओंकारेश्वर बांध के रिजर्वायर में लगभग 6 वर्ग किलोमीटर के दायरे में 5.5 लाख से ज्यादा सोलर पैनल तारों से जुड़े हुए हैं, जो सबसे पहले पास के फ्लोटिंग इंस्टॉलेशन तक पहुंचते हैं। 540 वाट की एक प्लेट है जो लगभग 8 हजार रुपए की है। यही वो प्लेट्स हैं जो वियतनाम और चीन से खरीदी गई है। इन सोलर प्लेटों पर सूरज की रौशनी पड़ने पर बिजली तैयार होती है। कैसे बनती है सोलर प्लेट से बिजली समझिए…
ये सारी प्लेट्स तारों के द्वारा स्ट्रिंग कॉम्बिनर बॉक्स से जुड़ते है। बॉक्स से बिजली इनवर्टर ट्रांसफार्मर तक जाती है जहां डायरेक्ट करंट (DC) से अल्टरनेटिंग करंट (AC) में इसे बदला जाता है और फिर बिजली सक्तापुर सब-स्टेशन के लिए भेज दिया जाता है। सक्तापुर सब स्टेशन से 38 किमी दूर स्थित छैगांव माखन (हरसूद) स्टेट पावर ग्रिड को 278 मेगावाट बिजली दे देते हैं। इसे आसानी से समझने के लिए अपने घर की छत का उदाहरण लिजिए। सोलर प्लेट अगर पानी की जगह आपकी छत पर रखा हो तब भी इसी प्रक्रिया से सोलर से बिजली बनती है। चीन को पछाड़ने की कहानी भी दिलचस्प
दुनिया का सबसे बड़ा सोलर फार्म चीन के देझोउ में स्थित देझोउ डिंगझुआंग फ्लोटिंग सोलर फार्म हुआ करता था। इसकी क्षमता 320 मेगावाट की है। बीजिंग की इलेक्ट्रिक कंपनी ने इसे पूरा किया। यह प्रोजेक्ट पीले सागर पर चीन के पूर्वी प्रांत शांदोंग में एक जलाशय पर है। ओमकारेश्वर प्रोजेक्ट के पहले चरण से 278 मेगावाट बिजली पैदा होने लगी है। ये प्रोजेक्ट 600 मेगावाट का है। जल्दी ही पूरी क्षमता से उत्पादन होने लगेगा। यानी चीन के फ्लोटिंग सोलर प्लान में पिछड़ने की शुरूआत हो चुकी है जो इस साल पूरी हो जाएगी। भारत में इससे पहले फ्लोटिंग सोलर पावर में केरल नंबर 1 पर था। वहां दो प्रोजेक्ट मिलाकर कुल 193 मेगावाट सोलर बिजली का उत्पादन होता है। ओंकारेश्वर में मॉनिटरिंग सिस्टम भी प्रो-एडवांस
AMP एनर्जी इंडिया के इंजीनियरिंग रवीश कुमार से हमने पूछा कि ओमकारेश्वर में कई किलोमीटर में फैले पैनल में कौन सा काम कर रहा है और कौन सा खराब हो रहा है इसका पता कैसे चलता होगा। रवीश ने बताया कि कि इस प्लांट में मेंटेनेंस की जिम्मेदारी हमारी है। ज्यादातर काम क्लीनिंग और मेंटेनेंस का है। तीनों यूनिट्स को मिलाकर लगभग 120 लोग काम करते है। प्लांट को स्टेबली रन करना जैसे इनवर्टर को रोज चालू करना अगर कोई प्रॉब्लम आती है तो उसका पता लगाके ठीक करना आदि ये सब हमारी कंपनी देखती है। स्काडा (SCADA) इंजीनियर गुलाब दास आनंद सक्तपुर सब स्टेशन के मॉनिटिंग रूम में स्क्रीन पर आंखे जमाए बैठे हैं। दैनिक भास्कर से कहते हैं कि हमारा काम इस सब स्टेशन को ऑटोमेशन पर रखना है और यहां जो भी जनरेशन डाटा है वो हमें SLDC इंदौर, SLDC जबलपुर और स्काडा इंदौर को भेजना होता है। स्काडा (SCADA) क्या है?
सुपरवाइजरी कंट्रोल और डाटा एक्विजिशन सिस्टम, जिसमें सुपरवाइजरी कंट्रोल मतलब आप कहीं भी बैठ कर कौन सी लाइन को बंद करना है या किसी भी लाइन को चालू करना जैसे काम तुरंत कर सकते हैं। इमरजेंसी में ये बेहद कारगर होता है। यह पूरा कंट्रोल आपके पास रहता है। डेटा एक्विजिशन सिस्टम यानी कि आपके पास एक साल का, दो साल का, पांच साल का जितनी भी अपनी जरूरत होती है वो सारे डाटा एक-एक सेकेंड के स्टोर होते रहते हैं। उससे किसी भी तरह से लॉस आदि की जो जानकारी चाहिए वो देख सकते हैं। मान लीजिए पास 12 फीडर है। इस सिस्टम से हम यह देख सकते हैं कि किस फीडर से ज्यादा जनरेशन आ रहा है, कहां कम हो रहा है। इससे मॉनिटर करना आसान होता है। दूसरी यूूनिट चालू होते ही 25 लाख यूनिट उत्पादन
सोलर एक्सपर्ट गौरव वारी ने बताया कि पहले फेज का काम कंप्लीट होने के बाद से ही बीते 25 दिसंबर से प्लांट 278 मेगावाट बिजली का उत्पादन कर रहा है। यह प्रतिदिन औसतन 11 लाख यूनिट बिजली बना रहा है। इस प्लांट की जब दूसरी यूनिट भी बनकर तैयार होने के बाद इससे हम प्रतिदिन औसतन 25 लाख यूनिट बिजली पैदा कर पाएंगे। एमपी में रिन्यूअल एनर्जी की ग्रोथ तेज
प्रदेश के अपर मुख्य सचिव मनु श्रीवास्तव ने दैनिक भास्कर से कहा कि मध्य प्रदेश में अभी रिन्यूअल एनर्जी के बहुत अच्छे प्रोजेक्ट्स लगाए गए हैं, जो सबसे विख्यात प्रोजेक्ट है वो मध्य प्रदेश का रीवा का 750 मेगावाट का प्रोजेक्ट है। जो हिंदुस्तान का पहला प्रोजेक्ट है जिसने कोयले से कम रेट्स पर सोलर एनर्जी दी है। जहां पर भारत सरकार की कंपनियां 4.5 रुपए की बिजली लेने के लिए सब्सिडी दे रही थी, वहां पर मध्य प्रदेश के इस प्रोजेक्ट ने बिना किसी सब्सिडी के 3 रुपए से कम की बिजली हासिल की है। हमारे लिए गर्व का विषय है कि यह प्रोजेक्ट मध्य प्रदेश के अलावा दिल्ली मेट्रो को बिजली दे रहा है। इसके बाद हम लोगों ने एक और नया प्रोजेक्ट लगाया है। ये आगर, शाजापुर और नीमच में लगा हुआ है। उसमें भी हमें बहुत कम रेट्स प्राप्त हुए हैं और वह राज्य के अलावा भारतीय रेल को भी बिजली दे रहा है। हम सोलर पर स्टोरेज का प्रोजेक्ट ला रहे हैं, जो अपनी तरह का पहला प्रोजेक्ट है और इस प्रोजेक्ट के अलावा हम यूपी और एमपी के दो प्रोजेक्ट भी लगा रहे हैं और इसके अलावा किसानों के लिए सोलर पंप लगाए जा रहे हैं। 21 हजार सोलर पंप लग चुके हैं जबकि 1 लाख सोलर पंप और लगाए जाने हैं।


