ग्वालियर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (उपभोक्ता फोरम) ने सर्विस टैक्स जबरन वसूलने के मामले में आदेश पारित किया है। फोरम ने कहा कि सर्विस टैक्स स्वैच्छिक है और इसे उपभोक्ता की सहमति के बिना नहीं लिया जा सकता। एक कैफे द्वारा 215 रुपए सेवा शुल्क वसूलना अनुचित व्यापार प्रथा माना गया और उपभोक्ता को 3000 रुपए क्षतिपूर्ति तथा वसूले गए पैसे वापस करने का आदेश दिया गया। विजय नगर निवासी ब्रजेश शर्मा 16 अप्रैल 2024 को अपने परिवार के साथ कैफे में भोजन करने गए थे। उन्हें कुल 2789.42 रुपए का बिल दिया गया, जिसमें 215 रुपए सर्विस चार्ज के रूप में जोड़े गए थे। शर्मा ने बिल की जांच के बाद इस शुल्क पर आपत्ति जताई, क्योंकि यह स्वैच्छिक होता है। उन्होंने कैफे प्रबंधन को नोटिस भी जारी किया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। मजबूर होकर उन्होंने उपभोक्ता फोरम में वाद दायर किया। शर्मा ने बताया कि जब उन्होंने सेवा शुल्क के विरोध में शिकायत की, तो वेटर ने कहा कि “महंगे होटल में सर्विस टैक्स देना अनिवार्य है।” कैफे प्रबंधन ने इस मामले में कोई ठोस जवाब या लिखित प्रतिक्रिया नहीं दी। उपभोक्ता फोरम का फैसला आयोग ने प्रस्तुत दस्तावेजों, बिल की प्रति और गवाहियों के आधार पर पाया कि कैफे द्वारा बिना सहमति के सेवा शुल्क वसूलना अनुचित है। आयोग अध्यक्ष राजेन्द्र प्रसाद शर्मा और सदस्य ज्योति रमण मीना की बेंच ने आदेश दिया कि फर्जी कैफे 45 दिनों के भीतर उपभोक्ता से वसूले गए 215 रुपए वापस करे। इसके अतिरिक्त, मानसिक पीड़ा के लिए 3000 रुपए और केस लड़ने के खर्च के तौर पर 1000 रुपए भी उपभोक्ता को अदा किए जाएँ।


