जबलपुर जिले में धान घोटाले के आरोपित मध्य प्रदेश स्टेट सिविल सप्लाई कार्पोरेशन के सेवानिवृत्त प्रबंधक दिलीप किरार पर अब आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने शिकंजा कस दिया है। ईओडब्ल्यू ने किरार के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और पद के दुरुपयोग के तहत एफआईआर दर्ज की है। मामले में धान परिवहन का ठेका लेने वाली कटनी की जेएसआर एजेंसी के प्रोपाइटर शैलेष उर्फ कन्हैया तिवारी को भी आरोपी बनाया गया है। जांच में सामने आया है कि किरार और तिवारी ने मिलकर धान परिवहन में अनियमितताएं कीं और शासन के 42 लाख 7 हजार 638 रुपए का फर्जीवाड़ा किया। किरार पर जबलपुर में प्रबंधक रहते हुए उपज की खरीद एवं परिवहन में भ्रष्टाचार के आरोप पहले से ही लगे हुए थे। तत्कालीन कलेक्टर के निर्देश पर किरार के साथ विभाग के 13 कर्मचारियों, 17 राइस मिल संचालकों, 25 सहकारी समितियों और धान खरीदी केंद्रों के 44 कर्मचारियों के खिलाफ जिले के अलग-अलग थानों में एफआईआर दर्ज की गई थी। पुलिस ने किरार को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। अब तक कुल 20 अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया जा चुका है। एसओआर दर से अधिक पर ठेका ईओडब्ल्यू की जांच में पता चला कि जेएसआर एजेंसी को 2023-25 के लिए गोसलपुर और कछपुरा रैक प्वाइंट से धान लोडिंग, लंबी दूरी परिवहन, गोदाम स्तर पर अनलोडिंग और स्टेकिंग का ठेका मिला था। एजेंसी ने 25 सितंबर, 2024 को गोसलपुर रैक प्वाइंट के लिए मध्य प्रदेश सिविल सप्लाई कार्पोरेशन के साथ एसओआर से 134 प्रतिशत अधिक दर पर एग्रीमेंट किया। इसी प्रकार 10 दिसंबर, 2024 को कछपुरा रैक प्वाइंट के लिए एसओआर से 123 प्रतिशत अधिक दर पर ठेका लिया गया। नियमों की अनदेखी कर एजेंसी को लाभ ईओडब्ल्यू की प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि तत्कालीन प्रबंधक किरार ने निजी एजेंसी को लाभ पहुंचाने के लिए पास के रैक प्वाइंट को छोड़कर दूर स्थित रैक प्वाइंट तक खाद्यान्न पहुंचाने के आदेश दिए। ऐसे नौ परिवहन आदेशों में गोदामों से खाद्यान्न गोसलपुर रैक प्वाइंट भेजा गया, जबकि ये गोदाम कछपुरा रैक प्वाइंट के पास ही थे। इस कारण परिवहन की लागत बढ़ी और एजेंसी को अधिक भुगतान हुआ। इससे तत्कालीन प्रबंधक किरार और जेएसआर एजेंसी के प्रोपाइटर कन्हैया तिवारी की मिलीभगत सामने आई।


