गुरुवार को महात्मा गांधी की जयंती पर प्रदेशभर की जेलों से 111 बंदियों को रिहा किया गया। इसी कड़ी में ग्वालियर केंद्रीय जेल से भी 7 बंदियों को उनके अच्छे आचरण के चलते रिहा किया गया है। राज्य सरकार के निर्देश पर इन बंदियों के परिजनों को उनकी रिहाई की सूचना पहले ही दे दी गई थी। जेल प्रशासन ने रिहा हुए बंदियों को फूलमाला, श्रीफल और जेल में किए गए काम के मेहनताने के चेक देकर उनके उज्जवल भविष्य की कामना की। इन बंदियों का आगे का जीवन जेल की चार दीवारी के बाहर अपने परिजनों के साथ बीतेगा। पहले साल में 2 बार दी जाती थी रिहाई पहले बंदियों को केवल स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) और गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) पर रिहा किया जाता था। पिछले दो साल से 2 अक्टूबर (गांधी जयंती) और 14 अप्रैल (संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती) पर भी बंदियों को रिहाई दी जा रही है। ग्वालियर जेल अधीक्षक विदित सरवरिया ने बताया कि अच्छे आचरण के आधार पर सात बंदियों को रिहा किया गया। रिहाई के लिए ऐसे बंदियों का चयन किया गया था, जो केवल एक अपराध में आरोपी थे। 12 से 14 साल की सजा काट चुके थे और जिनका जेल में आचरण अच्छा था। दुष्कर्म, लूट, डकैती या अन्य बड़े अपराधों में शामिल बंदियों को इस रिहाई में शामिल नहीं किया गया।


