बड़वानी में 55 फीट के रावण का दहन:लोग बोले- बिना पूजन किए पुतलों में आग लगाई, प्रशासन ने हमारी परंपरा तोड़ी

बड़वानी शहर में गुरुवार रात विजयदशमी का पर्व पूरे उत्साह और देशभक्ति के माहौल में मनाया गया। मुख्य दशहरा मैदान पर रात 8 बजे 55 फीट ऊंचे रावण सहित 45-45 फीट के कुंभकरण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया गया। आग लगते ही तीनों पुतले चंद सेकेंड में धू-धूकर जल गए, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में शहरवासी उमड़े। इधर, भगवान पटेल ने बताया कि बिना पूजा पाठ के ही प्रशासन ने रावण दहन कर दिया। जब की परंपरा अनुसार गांव पटेल पहले पूजा पाठ करते हैं। उसके बाद आतिशबाजी होती है और गांव के पटेल रावण का दहन करते हैं। मगर, जिला प्रशासन ने हमारी परंपरा तोड़ दी और बिना पटेल के रावण दहन कर दिया। कालिका माता मंदिर समिति के सदस्यों ने भी नाराजगी जाहिर की उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन को रावण दहन करना था तो फिर राम जी के जुलूस के लिए क्यों बुलवाया खुद ही प्रशासन ही सबकुछ कर लेता। रावण दहन से पहले, भगवान श्रीराम की सवारी निकाली गई। भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और हनुमान जी के रूप में सजे कलाकार, मां कालिका के दरबार से मुख्य मार्गों से होते हुए दशहरा मैदान पहुंचे। सुमधुर भजनों की धुन पर युवाओं की टोलियां रास्तेभर थिरकती रहीं। आतिशबाजी से आकाश जगमगा उठा और रावण दहन के साथ ही बुराई पर अच्छाई की जीत की शुभकामनाओं का दौर शुरू हो गया। ‘पुलवामा’ थीम पर किया गया दहन मुख्य आयोजन के बाद रात 8:30 बजे पुरानी हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी के युवा मित्र मंडल ने ओल्ड हाउसिंग बोर्ड हाट बाजार स्थल पर 41 फीट ऊंचे रावण के आकर्षक पुतले का दहन किया। यह दहन पुलवामा हमले और ऑपरेशन सिंदूर की थीम पर आधारित था, जो इस वर्ष के आयोजन का एक भावनात्मक पहलू रहा। प्रतीकात्मक रूप से तीन बालिकाओं ने आर्मी और एयरफोर्स की विशेष वेशभूषा में रावण को आग लगाकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। इसके अलावा, धोबड़िया हिल्स स्थित मां वैष्णोदेवी से भी रामजी की सवारी निकली और वहाँ भी रावण का दहन किया गया। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम इस दौरान पुलिस और प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। एसडीओपी दिनेश चौहान और शहर कोतवाली थाना प्रभारी दिनेश कुशवाह सहित पुलिस बल सुबह माता विसर्जन के साथ ही जगह-जगह तैनात कर दिया गया था। दशहरा मैदान से जुड़े मार्गों पर बैरिकेड्स लगाकर वाहनों का आवागमन रोका गया। नगर पालिका ने भी दशहरा स्थलों पर साफ-सफाई, पेयजल और विद्युत जैसी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित कीं।

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