भास्कर संवाददाता| भीलवाड़ा शहर में नेताजी सुभाष बंगाली समिति के दुर्गा महोत्सव के समापन पर गुरुवार को विजयादशमी पर मां दुर्गा को विदाई दी। आजाद नगर के सिखवाल भवन में चार दिवसीय दुर्गा महोत्सव के अंतिम दिन प्रतिमा विसर्जन के समय भक्तों की आंखें भर आईं। यह भक्तों की भावनाओं और माता के साथ उनके गहरे जुड़ाव का प्रतीक है। पंडाल से जैसे ही माता की प्रतिमा निकली लोग भावुक हो गए।.भक्तों ने अगले वर्ष पुनः स्थापित करने के वादे के साथ विदा किया। विदाई के समय मां दुर्गा के सामने महिलाएं लाल चुनरी और साड़ी में माथे पर सिंदूर सजाए खड़ी रहीं। थाली में सिंदूर और मिठाई लेकर एक-दूसरे के गालों पर सिंदूर लगाकर मां से आशीर्वाद मांग रही थीं। मां के माथे और चरणों में सिंदूर अर्पण कर महिलाओं ने सिंदूर खेला। ढोल की थाप पर महिलाएं नृत्य कर मां दुर्गा को बार-बार नमन कर रही थीं। बंगाली समाज में यह सिर्फ खेल नहीं, अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त करने का आदान-प्रदान है। जिसे महिलाएं एक-दूसरे से ले रही थीं। सिंदूर खेला के इस पल में रिश्तों की नई डोर बंध रही थीं। कोई सहेली के गाल पर सिंदूर लगा बोल रही थी तेरा घर सदा खुशियों से भरा रहे तो कोई सास अपनी बहू को गले लगाकर आशीर्वाद देती नजर आईं। इन सबके बीच माता की प्रतिमा के सामने महिलाएं मां से यही प्रार्थना कर रही थीं, मां आप अगली बार आएं तब तक हमारे जीवन में सुख-शांति बनी रहे। माता की विदाई की घड़ी आई तो सबके चेहरे पर मायूसी छा गई। आंखों में आंसू थे, जैसे कहना चाह रही हों कि मां हमें छोड़कर मत जाओ। महिलाएं विदाई के दौरान मां से अगली बार फिर से आने की प्रार्थना कर रही थीं। दशमी के दिन सुबह मां दुर्गा की पूजा कर महिलाओं ने मां दुर्गा, मां लक्ष्मी, मां सरस्वती की प्रतिमाओं को सिंदूर अर्पण कर सिंदूर खेला। सचिव मलय गोस्वामी, देवाशीष सामंत, दिनेश मंडल, सुभाष परमाणिक और शरत मजूमदार के सानिध्य में मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन किया।


