एक तरफ जहां ग्वालियर के विकास को लेकर मुख्यमंत्री तक मंत्री शिकायतें कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी लेने वाले विभाग कामों को शुरू तक नहीं करा पा रहे। स्थिति यह है कि मप्र सड़क विकास निगम (एमपीआरडीसी) के 4 ऐसे प्रोजेक्ट्स पर कई वर्ष का समय बीतने के बाद भी काम शुरू नहीं किया। जिनके पूरा होने पर प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से एक लाख से अधिक लोगों को फायदा मिलता। लेकिन एमपीआरडीसी के अधिकारियों का ये हाल है कि ठेका देने और भूमिपूजन के बाद भी काम शुरू नहीं हुआ। वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि एमपीआरडीसी मूलरूप से सड़कों का काम करती है। लेकिन अब आरओबी- अंडरपास के काम दे दिए हैं। इस कारण प्रोजेक्ट्स की दुर्गति हो रही। प्रोजेक्ट पूरे नहीं होने से मरीजों के साथ लोगों को लगाना पड़ा रहा है लंबा चक्कर अस्पताल रोड: एक हजार बिस्तर के नए अस्पताल को पुराने जेएएच अस्पताल परिसर से जोड़ने के लिए आमखो-कस्तूरबा चौक रोड के नीचे से अंडरपास बनना है। जिसका प्रस्ताव 2021 से कागजों में ही चला आ रहा है। क्योंकि, निर्माण के लिए राशि स्वीकृत होने के बाद एक फर्म को 17 करोड़ में ठेका दे दिया है। फिर भी एमपीआरडीसी के अधिकारी इस प्रोजेक्ट का काम शुरू नहीं करा पाए हैं। असर: अस्पताल परिसर मर्ज न होने से रोजाना हजारों मरीज व उनके अटेंडरों को लगभग ढाई किमी का चक्कर लगाकर कभी चेकअप, कभी जांच तो कभी इलाज के लिए आना जाना पड़ता है। मोहना: इंदौर रेलवे लाइन पर स्थित मोहना ट्रैक पर रेल ओवर ब्रिज को स्वीकृति मिले भी कई वर्ष बीत चुके हैं। लेकिन एमपीआरडीसी के अधिकारी इस आरओबी का काम शुरू नहीं किया है। करीब 3 साल बीतने के बाद इस प्रोजेक्ट के लिए अब तक न तो भू-अर्जन हो सका है और न ड्राइंग का काम पूरा हो पाया है। असर: मोहना में बने नए पुलिस थाने से कॉलेज के पास स्थित ट्रेचिंग ग्राउंड तक ये आरओबी बनने पर 10 हजार से ज्यादा लोगों को सीधा फायदा होगा। इन लोगों को करीब 2-3 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। जलालपुर: करीब 2 वर्ष पहले जलालपुर से सुसेरा कोठी होते हुए नेशनल हाइवे 44 के झांसी बायपास को जोड़ने के लिए सेतु बंधन योजना के तहत आरओबी स्वीकृत हुआ था। 41.65 करोड़ की लागत से बनने वाले इस आरओबी से 30 गांव की आबादी को रेलवे ट्रैक की फाटक व्यवस्था पर निर्भर नहीं रहना होगा। लेकिन 132 केवी की बिजली लाइन की शिफ्टिंग के कारण इस प्रोजेक्ट पर काम नहीं हुआ। असर: ये आरओबी बनने से शर्मा फार्म रोड, गंगा मालनपुर रोड के ट्रैफिक को पुरानी छावनी-रायरू होते हुए नहीं जाना पड़ेगा। बल्कि इस रूट से सीधे नेशनल हाइवे पर पहुंचा जा सकेगा। हरिशंकरपुरम: एजी ऑफिस के पास स्थित हरिशंकरपुरम से महलगांव के बीच बनी पुरानी पुलिया के स्थान पर अंडरपास बनना है। 12.41 करोड़ की लागत से तैयार होने वाले इस अंडरपास का ठेका हो गया है। 5 मई को भूमिपूजन भी हो गया, लेकिन काम शुरू नहीं हो सका। क्योंकि, अंडरपास के लिए जिस जमीन की जरुरत है। उसका भू-अर्जन नहीं हुआ। असर: पुलिया की चौड़ाई व ऊंचाई कम होने से बड़ी कार एवं अन्य वाहन आ-जा नहीं पाते। उन्हें करीब 2-3 किमी का चक्कर लगाना पड़ता है। ये बन जाता तो रोज करीब 20 हजार वाहन चालकों को सीधी राहत मिलेगी। मेरी जानकारी में मामले आए हैं, जल्दी कराएंगे ^मेरी जानकारी में अभी ये मामले नहीं हैं। जल्द ही अधिकारियों से इन सभी मामलों की जानकारी लेकर समीक्षा करता हूं। जिसके भी स्तर पर लापरवाही हो रही है। उनके खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाएगी। – राकेश सिंह, पीडब्ल्यूडी मंत्री


