दशहरे पर शहर का माहौल उत्सव और रोमांच से भर गया। फूलबाग मैदान में रामलीला के मंच से श्रीराम ने जैसे ही बाण छोड़ा वैसे ही 65-65 फीट ऊंचे रावण, कुम्भकर्ण और मेघनाद के पुतले एक-एक कर जल गए। इस दौरान पटाखों की गड़गड़ाहट और जय श्रीराम के नारे गूंजते रहे। हजारों लोगों ने इस पल को अपने मोबाइल में कैद किया। वहीं थाटीपुर में 51 फीट ऊंचे पुतलों का दहन हुआ। उधर डीडी नगर में केवल रावण का 70 फीट ऊंचा पुतला आकर्षण का केंद्र रहा। आयोजकों ने दावा किया कि यह शहर का सबसे बड़ा पुतला है। बच्चे आतिशबाजी देख झूम उठे, महिलाएं और बुजुर्ग भी उत्सव में शामिल रहे। पुलिस और प्रशासन ने चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था की। हर जगह संदेश यही रहा। बुराई चाहे कितनी भी ऊंची क्यों न हो, सत्य और धर्म की जीत तय है। यह पर्व हमें एक ही संदेश देता है- यदि मन में सत्य की लौ जलती है तो बुराई धुआं-धुआं हो जाती है। (पेज 4 भी पढ़ें) }फोटो: विक्रम प्रजापति ग्वालियर में 3 बड़े आयोजन बुराई खाक…


