विजयादशमी पर गुरुवार को शहर में ढाई हजार से ज्यादा स्थानों पर रावण दहन के आयोजन हुए। 12 से अधिक स्थानों पर 25 फीट से ऊंचे पुतले जलाए गए। इनमें 5 जगह तो पुतले 100 फीट से भी अधिक ऊंचे थे। शाम 4 बजे पश्चिम शहर में बारिश हुई तो दशहरा मैदान में रावण का पुतला गीला हो गया। बारिश थमते ही, हवा चलते ही दशहरा मैदान पर भीड़ जुटने लगी। शाम 6 बजे रावण की आंखें चमकने लगी, दहन का माहौल बनने लगा। शाम सवा 7 बजे वानर सेना उछल-कूद करती हुई मैदान में पहुंची। मंत्रोच्चार हुआ। अंधेरा होते ही आकाश में पटाखों के सतरंगी नजारे दिखते रहे। ठीक 7.25 पर रावण दहन हो गया। तीन-चार घंटों से जमा भीड़ महज सवा मिनट में जलकर खाक हुए रावण के बाद निकलने की जल्दी में दिखी। उषा नगर, नरेंद्र तिवारी, मार्ग, अन्नपूर्णा थाना रोड जाम हो गए। तासु तेज समान प्रभु आनन हरषे देखि संभु चतुरानन
जय जय धुनि पूरी ब्रह्मंडा
जय रघुबीर प्रबल भुजदंडा भावार्थ- रावण का तेज प्रभु के मुख में समा गया। यह देखकर शिवजी और ब्रह्माजी हर्षित हुए। ब्रह्माण्डभर में जय-जय की ध्वनि भर गई। प्रबल भुजदण्डों वाले श्री रघुवीर की जय हो। वल्लभनगर में एक्टिवा पर गिरा जलता रावण वल्लभनगर में जल रहा रावण अचानक ब्रिज पर गिर गया। इस दौरान कुछ लोग ब्रिज पर खड़े होकर रावण दहन देख रहे थे। हालांकि जैसे ही रावण उनकी तरफ आया तो लोग दौड़ पड़े लेकिन एक बाइक चपेट में आ गई। लोगों ने पानी डालकर आग बुझाई। ट्रैफिक को थोड़ी देर के लिए डाइवर्ट कर दिया गया।


