प्रदेश में सैंपल फेल होने के बाद भी कंपनियों पर कार्रवाई नहीं हो रही, वहीं ड्रग विभाग के आला अधिकारियों ने उन्हें बचाने के लिए अलग ही ‘कानून’ बना दिया। इस नए नियम के मुताबिक यदि किसी दवा में कोई भी एक साल्ट शून्य है, तो भी उस दवा को नकली नहीं माना जाएगा। विभागीय अधिकारियों ने न केवल यह नियम बनाया बल्कि विधानसभा में नकली दवाइयों की मांगी गई रिपोर्ट में इसे साबित करते हुए उन सैंपल को भी क्लीन चिट दे दी जिनमें घटक नहीं थे। मामले को लेकर विभाग की ओर से कमेटी भी बनाई गई और ड्रग विभाग के अधिकारियों से जवाब भी मांगा गया। इसके तीन महीने बाद तक भी मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई है। मामले में ड्रग कंट्रोलर अजय फाटक ने कहा कि हमने पूरी जानकारी उच्चाधिकारियों को दे दी है। कमेटी में सभी शामिल थे और जो तय किया गया, उस पर आगे की प्रक्रिया होगी। विधानसभा और लोकसभा में दी अलग-अलग जानकारी ड्रग विभाग की ओर से विधानसभा को दी गई जानकारी में बताया गया कि 1 जनवरी 2022 से 31 दिसम्बर 2024 तक 36 सैंपल नकली थे। लेकिन इससे पहले लोकसभा में जब यह जानकारी मांगी गई तो ड्रग विभाग ने इसी अवधि में 55 सैंपल नकली होना बताया था। बाद में इसका पता लगने पर ड्रग अधिकारियों की ओर से जवाब दिया गया कि जिन सैंपल में कोई एक घटक शून्य था, वह नकली नहीं माना गया है। इसके बाद आयुक्त खाद्य सुरक्षा व औषधिक नियंत्रक ने कमेटी बनाई। कमेटी में डिप्टी डायरेक्टर गिरीश कुमार, लीगल आफिसर अजित कालरा, ड्रग कंट्रोलर अजय फाटक को शामिल किया गया। कमेटी ने माना ड्रग कंट्रोलर सेकंड की ओर से गलत सूचना दी गई है। हालांकि, मामले में अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। कमेटी की रिपोर्ट में यहां तक सामने आया कि ड्रग कंटोलर सेकंड राजाराम ने अपने बनाए गए नियम को बदलने के लिए जयपुर के ही एडीसी (एडिशनल ड्रग कंट्रोलर) को नोटशीट बदलने व उसे नष्ट करने का दबाव बनाया। इन दवाओं में साल्ट नहीं, पर कभी कार्रवाई नहीं नियम यह है ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट के तहत नकली दवा (स्पूरियस ड्रग) को अधिनियम धारा 17बी (डी) में परिभाषित किया गया है। जिसके तहत यदि दवा को पूर्णतया अथवा आंशिक रूप से अन्य औषधि या पदार्थ से प्रतिस्थापित किया गया है तो वह नकली की श्रेणी में होगी। यानी कि दवा में कोई घटक शून्य है तो वह नकली ही दवा मानी जाएगी। अब जबकि इस एक्ट को केवल केन्द्र सरकार की ओर से ही बदला जा सकता है लेकिन वह आज तक भी नहीं बदला गया है। कमेटी के सभी सदस्यों ने एक्ट के तहत यह भी माना कि यदि दवा में घटक नहीं हैं तो वह नकली ही मानी जाएगी। लेकिन ड्रग कंट्रोलर सेकंड ने यह नहीं माना।


