बारां नगर परिषद अब घर-घर कचरा संग्रहण व्यवस्था में सुधार के लिए नवाचार करेगी। इस कार्य को एक संवेदक कंपनी को सौंपा जाएगा, जो आधुनिक तकनीक का उपयोग कर व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाएगी। इस नई व्यवस्था के तहत, शहर के सभी 60 वार्डों में घरों पर आरएफआईडी (रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन) टैग लगाए जाएंगे। इन टैग्स की मदद से घर-घर कचरा संग्रहण में लगे वाहनों की प्रभावी निगरानी की जा सकेगी। नगर परिषद ने इसके लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। वर्तमान में नगर परिषद की कचरा संग्रहण व्यवस्था सुव्यवस्थित नहीं है। कई बार तीन-चार दिनों तक कचरा संग्रहण वाहन नहीं पहुंचते, जिससे लोग कचरा इधर-उधर फेंकने को मजबूर होते हैं और गंदगी फैलती है। नगर परिषद के पास वर्तमान में 2 डम्पर, 2 ट्रैक्टर-ट्रॉली, एक लोडर मशीन, 28 ऑटो टिपर और 20 ई-रिक्शा उपलब्ध हैं, लेकिन इनमें से कई वाहन खराब स्थिति में हैं। परिषद ने इस नई योजना का प्रस्ताव डीएलबी (स्थानीय निकाय विभाग) को भेजा था, जिसे स्वीकृति मिल चुकी है। अधिकारियों ने बताया कि नई व्यवस्था के तहत, संवेदक को नगर परिषद के मौजूदा संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे। आवश्यकता पड़ने पर संवेदक अपने स्तर पर भी अतिरिक्त संसाधन जुटाएगा। निविदा प्रक्रिया पूरी होने के बाद, संवेदक वार्डवार सर्वे कर गलियों, सोसायटियों और अन्य स्थानों पर आरएफआईडी चिप लगवाएगा। गाड़ियों की उपलब्धता, ड्राइवर, डीजल और मरम्मत का पूरा जिम्मा भी संवेदक का ही होगा। परिषद एसआई नरसीलाल स्वामी ने बताया कि तकनीक से वाहन वेस्ट कलेक्शन के लिए गया है या नहीं? गया तो कौन से एरिया, मोहल्ला या गली में पहुंचा या नहीं? महीने में कितने दिन नहीं जाता है? इसका पता चल सकेगा। उन्हें बार-बार फोन करके वाहन बुलाने की जरूरत नहीं होगी, क्योंकि प्रोजेक्ट के तहत पहले चरण में संवेदक द्वारा वार्डों में गली के मुहाने और अंतिम छोर पर आरएफआईडी तकनीकी लगाएगी, जो सेंसर युक्त प्रणाली है। वाहन आते ही सेंसर डिटेक्ट करेगा, वह सूचना कंट्रोल रूम तक पहुंच जाएगी तथा उसे परिषद टीम की ओर से हर महीने प्रत्येक वार्ड में पहुंचकर लोगों से वेरिफिकेशन भी किया जाएगा। उसके बाद ही संवेदक को भुगतान आदि हो सकेगा। इस व्यवस्था से न केवल परिषद की डोर डोर वेस्ट कलेक्शन की व्यवस्था सुधरेगी, आमजन को भी राहत मिलेगी।


