खांसी की दवा सही, इससे बच्चों की मौत नहीं हुई:लैब रिपोर्ट में दवा के सभी सॉल्ट की मात्रा स्टेंडर्ड मिली, 6 बैच की जांच करवाई

जिस खांसी की दवा को लेकर बवाल मचा हुआ है। वह सरकारी जांच में सही पाई गई है। खांसी का सीरप पीने से पिछले दिनों बच्चों के बीमार होने और कथित तौर पर मौत के मामले सामने आए थे। इसके बाद सरकार ने 6 अलग-अलग बैच की जांच करवाई। इसमें दवा के सभी सॉल्ट की मात्रा स्टेंडर्ड पाई गई। सरकार से जारी रिपोर्ट के मुताबिक ये बैच सीकर, झुंझुनूं, भरतपुर समेत अन्य जिलों से उठाए गए थे, जिनको जांच के लिए ड्रग कंट्रोल डिपार्टमेंट की लैब में भिजवाया गया था। लैब की शुक्रवार को रिपोर्ट आई। रिपोर्ट में इन सभी बैच के सैंपल को सही पाया गया है। बच्चों की मौत के बाद उठे थे सवाल दरअसल, सीकर, भरतपुर में डेक्सट्रोमेथारपन हाइड्रोब्रोमाइड आईपी/13.5mg/5ml सीरप पीने से 4 से ज्यादा बच्चे बीमार हो गए थे। सीकर और भरतपुर में एक-एक बच्चे की मौत का मामला सामने आया था। इस पूरे घटनाक्रम के बाद सरकार ने सीरप के वितरण पर रोक लगाते हुए सीरप बनाने वाली कंपनी की जांच शुरू करवाई थी। कंपनी की जारी दवाइयों के अलग-अलग बैच के सैंपल लेकर उनको जांच के लिए सरकारी लैब में भिजवाया था, जिसकी आज जांच रिपोर्ट आई है। सीकर सीएमएचओ का दावा- खांसी की सिरप पीने से बच्चे की मौत नहीं हुई इधर, सीकर में खांसी की सिरप पीने से बच्चे की मौत नहीं हुई थी। यह दावा सीकर सीएमएचओ ने किया था। सरकार को भेजी रिपोर्ट में बताया गया था कि जिस सिरप को पीने से बच्चे की मौत होना बताया जा रहा है। उस बैच की दवा झुंझुनूं जिले में सप्लाई ही नहीं हुई थी। हेल्थ मिनिस्टर बोले- दवा में कोई खराबी नहीं इस मामले में हेल्थ मिनिस्टर गजेंद्र सिंह खींवसर ने भी अपने विभाग और कंपनी का बचाव करते हुए कहा- हमने सरकारी स्तर पर भी दवाइयों की जांच करवा ली है। उनमें कोई खराबी नहीं निकली है। ये भी पढ़ें… कफ सिरप से बच्चों की मौत के बाद बड़ा खुलासा:ड्रग कंट्रोलर का कारनामा, नकली दवाओं की परिभाषा बदली; कई फार्मा कंपनियों को बचाया सरकारी अस्पतालों में मिलने वाली कफ सिरप पीने से 2 बच्चों की मौत के साथ ही तबीयत बिगड़ने के मामले सामने आ रहे हैं। जिस विभाग पर ऐसी एक्शन लेने का जिम्मा है, उसी के अधिकारी फार्मा कंपनियों को बचाने में जुटे हैं। (पूरी खबर पढ़ें)

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