हरदा कलेक्टर सिद्धार्थ जैन ने शुक्रवार को जिले के जनप्रतिनिधियों के साथ भावांतर योजना पर बैठक की। उन्होंने कहा कि भावांतर योजना से किसानों को सोयाबीन बेचने में कोई नुकसान नहीं होगा। कलेक्टर ने जनप्रतिनिधियों से किसानों को योजना के लाभ समझाने का आग्रह किया। बैठक में जिला पंचायत अध्यक्ष गजेंद्र शाह, भाजपा जिलाध्यक्ष राजेश वर्मा, जिला पंचायत उपाध्यक्ष दर्शनसिंह गहलोत सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। कलेक्टर ने योजना से संबंधित जनप्रतिनिधियों की जिज्ञासाओं का समाधान भी किया। इससे पहले, उन्होंने किसान संघ के पदाधिकारियों और कृषि उपज मंडियों के अनाज व्यापारियों के साथ भी बैठकें कर योजना की बारीकियों से अवगत कराया था। कलेक्टर ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा किसानों को उनकी फसलों का उचित दाम दिलाने के उद्देश्य से भावांतर योजना लागू की गई है। इस योजना के तहत ई-उपार्जन पोर्टल पर 3 से 17 अक्टूबर 2025 तक सोयाबीन का पंजीयन किया जाएगा। फसल विक्रय के लिए भावांतर अवधि 24 अक्टूबर 2025 से 15 जनवरी 2026 निर्धारित की गई है। कलेक्टर ने सभी संबंधित अधिकारियों को जिले में भावांतर योजना के प्रभावी संचालन के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसान पंजीयन के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं ताकि किसानों को कोई परेशानी न हो। उन्होंने जिले के सभी सोयाबीन उत्पादक किसानों से निर्धारित समय अवधि में अपना पंजीयन कराने की अपील की। कलेक्टर ने किसानों से यह भी कहा कि वे अपना सोयाबीन मंडी में ही बेचें और बिचौलियों से बचें। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की यह भावांतर योजना उचित औसत गुणवत्ता (एफएक्यू) उपज के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी देती है। योजना के तहत, यदि किसान को एमएसपी से कम लेकिन मंडी मॉडल रेट से अधिक भाव मिलता है, तो उसे विक्रय मूल्य और एमएसपी के अंतर की राशि प्राप्त होगी। इसी प्रकार, यदि एमएसपी और मंडी मॉडल रेट दोनों से कम भाव प्राप्त होता है, तो मंडी मॉडल रेट और एमएसपी के अंतर की राशि किसान को मिलेगी।


