डीडवाना के स्कूल शिक्षा परिवार ने भरतपुर जिले के खेरली मोड़ थाने के एसएचओ के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर डीजीपी के नाम ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में बताया गया कि खेरली मोड़ थाना पुलिस का एक सिपाही स्कूल में एक छात्र की ट्रांसफर सर्टिफिकेट (टीसी) लेने पहुंचा। स्कूल प्रशासन ने नियमानुसार अभिभावक का लिखित प्रार्थना पत्र अथवा कोई कानूनी आदेश प्रस्तुत करने को कहा। इस पर सिपाही ने संबंधित एसएचओ से फोन पर बात करवाई। बताया गया कि एसएचओ ने कहा कि “एसएचओ का आदेश ही काफी है।”
स्कूल प्रशासन ने नियमों के तहत अभिभावक की सहमति के बाद, बिना किसी बकाया शुल्क के, टीसी प्रदान कर दी। लेकिन टीसी लेने के बाद एसएचओ का रवैया आक्रामक हो गया। आरोप है कि उन्होंने स्कूल संचालकों के साथ मारपीट की, वाहन में बैठाकर ले गए तथा रास्ते में महिला अभिभावक से झूठी शिकायत दर्ज कराने और अन्य मामलों में फंसाने की धमकी दी।
शिकायत में कहा गया कि थाने ले जाने के बाद भी एसएचओ का व्यवहार असंवेदनशील रहा। स्थानीय सरपंच एवं गणमान्य नागरिकों ने समझाइश दी, लेकिन इसके बावजूद शिक्षकों को धारा 151 में बंद कर दिया गया। जबकि कानूनन स्कूल बिना अभिभावक के लिखित प्रार्थना पत्र के टीसी नहीं दे सकता और पुलिस की मौखिक मांग पर टीसी न देना कोई अपराध नहीं है।
स्कूल शिक्षा परिवार ने ज्ञापन में कहा कि उक्त प्रकरण से प्रदेशभर के स्कूल संचालकों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। जगह-जगह धरना-प्रदर्शन एवं आंदोलन की स्थिति बन रही है। हालांकि पुलिस विभाग ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए संबंधित एसएचओ को एपीओ कर दिया है, लेकिन संगठन की मांग है कि उन्हें निलंबित किया जाए और भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के ठोस उपाय किए जाएं। ज्ञापन देने वालों में मुतलिब कोटवाल, सुशील गौड़, दिनेश गहलोत सहित अन्य शिक्षक मौजूद रहे।


