नर्मदापुरम में जिंदा युवक को संबल कार्ड में मृत बताने के मामले में पिछले एक सप्ताह से जांच जारी है। जनपद पंचायत माखननगर अब युवक को कागज में जीवित दिखाने की प्रक्रिया कर रही है। जनपद पंचायत ने जिपं और श्रम विभाग को पत्र लिख गलती में सुधार करने लिखा है। वहीं, जांच टीम अब यह तय नहीं कर पाई है कि अंत्येष्टि सहायता राशि के फॉर्म में किसने जीवित हितग्राही युवक का नाम मृतक के कॉलम में लिख दिया था। फिलहाल अफसर जांच का हवाला देकर बाद में जिम्मेदारी तय करने और वैधानिक कार्रवाई की बात कर रहे है। बता दें कि, 24 दिसम्बर को माखननगर के बागलखेड़ी पंचायत निवासी युवक नरेश अहिरवार कलेक्ट्रेट में जनसुनवाई और एसपी ऑफिस पहुंचा था। युवक ने अफसरों के सामने कहा कि मैं जिंदा हूं, लेकिन सरकार की संबल योजना में मुझे चार साल पहले ही मृत बता दिया गया। इतना ही नहीं मेरे नाम से अंत्येष्टि सहायता राशि 5 हजार रुपए की निकाली गई। मेरी मौत की जानकारी मुझे चार दिन पहले तब पता चली, जब पत्नी भारती अहिरवार के प्रसव के बाद संबल योजना के तहत मिलने वाली प्रसूति सहायता के लिए मैं रजिस्ट्रेशन करवाने दुकान पर पहुंचा। दुकानदार ने मेरी समग्र आईडी डालते ही मुझे कहा कि आपकी तो चार साल पहले मौत हो चुकी है। पीड़ित नरेश अहिरवार ने मांग की कि मुझे जीवित घोषित किया जाए और मृत्यु घोषित करने वाले तत्कालीन सचिव और सरपंच के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। बागलखेड़ी पंचायत का है मामला जीवित व्यक्ति को मृत बताने का मामला जिले के माखननगर तहसील के ग्राम बागलखेड़ी का है। पीड़ित नरेश अहिरवार ने बताया मैं मिस्त्री का काम करता हूं। पत्नी भारती अहिरवार ने 23 नवंबर को बेटे को जन्म दिया है। मेरे पास संबल योजना का कार्ड है। संबल में प्रसूति आर्थिक सहायता राशि देने का प्रावधान है। योजना का लाभ लेने के लिए जब मैंने दुकान पर कार्ड चेक कराया तो ऑनलाइन दिखाया कि जुलाई 2020 मेरी मौत हो चुकी है। 15 जुलाई 2020 को अंत्येष्टि सहायता राशि 5 हजार भी निकल चुकी है। 4 साल पहले मां की मौत, मृतक की जगह हितग्राही का नाम माखननगर जनपद पंचायत के सीईओ सतीश अग्रवाल ने बताया पीड़ित नरेश अहिरवार की मां की चार साल पहले मौत हुई है। अंत्येष्टि सहायता राशि के पत्रक में राशि प्रदान करने वाले हितग्राही की जगह किसी दूसरी महिला का नाम लिखा है। आवेदक ने आवेदन किया था। त्रुटि वश मृतक के नाम के स्थान पर हितग्राही आवेदक का लिखा गया है। सुधार के लिए वरिष्ठ कार्यालय और श्रम विभाग को पत्र लिखा है। मामले की जांच भी कर रहे है।


