गुना जिले की चांचौड़ा विधानसभा में बहुप्रतीक्षित कुंभराज वृहद सिंचाई परियोजना के तहत डैम का निर्माण अब घटाखेड़ी गांव में किया जाएगा। यह फैसला शुक्रवार शाम बीनागंज में हुई एक अहम बैठक में लिया गया। बैठक की अध्यक्षता जिले के प्रभारी मंत्री एवं खाद्य नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने की। इस दौरान परियोजना के तमाम तकनीकी पहलुओं के साथ-साथ प्रभावित गांवों को मिलने वाले मुआवजे और पुनर्वास पर भी चर्चा हुई। 40 लाख लोगों को मिलेगा पानी बैठक में जल संसाधन विभाग के विकास राजोरिया ने प्रेजेंटेशन के जरिए बताया कि यह परियोजना पार्वती–कालीसिंध–चंबल लिंक का हिस्सा है और यह क्षेत्र के जल संसाधनों के विकास में मील का पत्थर साबित होगी। इससे 6 लाख 13 हजार 520 हेक्टेयर कृषि भूमि सिंचित होगी और लगभग 40 लाख लोगों को पीने का पानी भी मिल सकेगा। डैम निर्माण के लिए सबसे उपयुक्त प्रेजेंटेशन के दौरान बड़ागांव, दीतलबाड़ा, घटाखेड़ी सहित अन्य संभावित स्थानों की तुलना की गई। विस्तृत सर्वेक्षण और तकनीकी मानकों के आधार पर घटाखेड़ी को डैम निर्माण के लिए सबसे उपयुक्त स्थान माना गया। एक्सेस सर्वे, सबमर्ज सर्वे और अन्य तकनीकी परीक्षणों के आंकड़े और नक्शे बैठक में पेश किए गए। 438 गांव होंगे लाभान्वित इस परियोजना से कुल 438 गांव लाभान्वित होंगे। वहीं डूब क्षेत्र में आने वाले गांवों के प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा और पुनर्वास पैकेज दिया जाएगा। कलेक्टर गाइडलाइन के अनुसार कृषि भूमि का दोगुना मूल्य मिलेगा। साथ ही 18 वर्ष से अधिक उम्र के हर प्रभावित व्यक्ति को 3000 वर्गफुट का विकसित आवासीय प्लॉट दिया जाएगा। अन्य राहतें और सुविधाएं भी दी जाएंगी। प्रभारी मंत्री ने कहा- “परियोजना ऐतिहासिक कदम” बैठक में प्रभारी मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि यह परियोजना क्षेत्र के विकास की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। इससे न केवल हजारों परिवारों को लाभ मिलेगा, बल्कि जिले की कृषि क्षमता भी दोगुनी हो जाएगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि ग्रामीणों के सुझावों और आपत्तियों को सरकार गंभीरता से ले रही है और हर तकनीकी पहलू पर बारीकी से विचार किया गया है। ग्रामीण बोले- सिंचित जमीन डूबेगी, राजस्थान को मिलेगा फायदा हालांकि, घटाखेड़ी में डैम बनने की घोषणा के बाद से ही स्थानीय ग्रामीण विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस उपजाऊ और सिंचित ज़मीन को डुबाकर राजस्थान की बंजर ज़मीन को पानी देना न्यायसंगत नहीं है। ग्रामीण पहले बीनागंज में प्रदर्शन कर चुके हैं और बीनागंज से गुना तक ट्रैक्टर रैली भी निकाल चुके हैं। उन्होंने प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए मांग की है कि बड़े डैम की बजाय छोटे-छोटे डैम बनाए जाएं ताकि नुकसान कम हो।


