छत्तीसगढ़ में ‘मरमेड बेबी’ का जन्म, 3 घंटे में मौत:नवजात के दोनों पैर जलपरी जैसे जुड़े हुए थे, डॉक्टर बोले-दुनिया में सिर्फ 300 केस

छत्तीसगढ़ के धमतरी जिला अस्पताल में शुक्रवार को ‘मरमेड सिंड्रोम’ से पीड़ित एक बच्चे का साढ़े 12 बजे जन्म हुआ। जन्म के लगभग 3 घंटे बाद मौत हो गई। नवजात के दोनों पैर आपस में जुड़े हुए थे। मरमेड बेबी जलपरी की तरह नजर आ रहा था। 28 वर्षीय महिला का यह दूसरा बच्चा था। जानकारी के मुताबिक, लेबर पेन के बाद 8 महीने की प्रेग्नेट महिला को बुधवार सुबह धमतरी जिला अस्पताल में भर्ती किया गया था। जांच के बाद डॉक्टर्स ने डिलीवरी करने का फैसला लिया। डिलीवरी के बाद डॉक्टर्स ने इसे रेयर केस बताया है। साथ ही ‘मरमेड सिंड्रोम’ या ‘सिरेनोमेलिया’ बताया। डॉक्टर्स ने बताया कि इस तरह के बच्चों में जन्म के बाद लिंग का पता नहीं चल पाता। डॉक्टर्स के अनुसार, ऐसे बच्चों का जीवनकाल आमतौर पर बहुत कम होता है। इसे छत्तीसगढ़ का पहला और भारत का पांचवां केस बताया जा रहा है। वहीं दुनिया में 300 केसेस सामने आए हैं। 800 ग्राम था बच्चे का वजन डिलीवरी कराने वाली डॉक्टर रागिनी सिंह ठाकुर ने बताया कि बच्चे के दोनों पैर जलपरी की तरह आपस में जुड़े हुए थे। शिशु का ऊपरी हिस्सा जैसे आंख, नाक और हृदय विकसित थे, लेकिन रीढ़ की हड्डी से नीचे का हिस्सा जुड़ा हुआ था। बच्चे का वजन केवल 800 ग्राम था। ​​​​आमतौर पर सोनोग्राफी में ही ऐसी असामान्यता का पता चल जाता है, लेकिन इस मामले में सीधे डिलीवरी के बाद जानकारी सामने आई। उन्होंने बताया कि उचित पोषण की कमी, मां से बच्चे तक अनुचित रक्त संचार या भ्रूण का पर्यावरणीय टेराटोजेन (कुछ दवाएं) के संपर्क में आने से यह स्थिति उत्पन्न हो सकती है। कुछ घंटे या कुछ दिनों बाद हो जाती है मौत विशेषज्ञों के अनुसार, ‘मरमेड सिंड्रोम’ लड़कों में लड़कियों की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक देखने को मिलता है। यह स्थिति इतनी गंभीर होती है कि अधिकतर शिशु मृत पैदा होते हैं, और यदि जीवित भी होते हैं तो उपचार के बावजूद कुछ घंटे या अधिकतम कुछ दिन ही जीवित रह पाते हैं। इस जन्मजात विकृति में शरीर के निचले हिस्से का विकास अत्यंत अविकसित होता है, जिससे जीवन-रक्षक अंग जैसे किडनी, यूरेथ्रा (मूत्रमार्ग) और जेनिटल्स (जननांग) पूरी तरह विकसित नहीं हो पाते। यही कारण है कि शिशु की मृत्यु दर इस स्थिति में लगभग शत-प्रतिशत मानी जाती है। दुनियाभर में लगभग 300 केस सामने आए ‘इंटरनेशनल जर्नल ऑफ रिप्रोडक्शन, कॉन्ट्रासेप्शन, ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी’ में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, ‘मरमेड सिंड्रोम’ के अब तक 1542 से लेकर आज तक दुनियाभर में केवल लगभग 300 मामलों का ही दस्तावेजीकरण किया गया है। यह इसे दुनिया की सबसे दुर्लभ जन्मजात विकृतियों में से एक बनाता है। भारत में इससे पहले 2016 में उत्तर प्रदेश में इस तरह का पहला मामला सामने आया था, जहां एक महिला ने ‘मरमेड बेबी’ को जन्म दिया था। वह शिशु केवल 10 मिनट तक ही जीवित रह पाया था। क्या होता है मरमेड सिंड्रोम? मरमेड सिंड्रोम या सिरेनोमेलिया एक बहुत ही दुर्लभ जन्मजात स्थिति है। इसमें बच्चे के पैर आपस में जुड़े हुए पैदा होते हैं, जैसे जलपरी की पूंछ। इस सिंड्रोम के कारण बच्चे को किडनी, हृदय, फेफड़े और जेनिटल्स जैसी इंटरनल इंटरनल ऑर्गन की गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। अक्सर इस स्थिति में बच्चे बहुत लंबे समय तक जीवित नहीं रहते। ……………………… नवजात की मौत से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… गले में अटका चना…डेढ़ साल के मासूम की मौत: बिलासपुर में खेलते-खेलते निगला, सांस-नली में फंसा; छटपटाने लगा, अस्पताल पहुंचने से पहले तोड़ा दम छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में गले में चना अटकने से डेढ़ साल के मासूम की मौत हो गई। बच्चा खेलते समय चना निगल गया, जो गले में फंस गया। इससे बच्चे का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। परिजन उसे अस्पताल लेकर गए। लेकिन, चना सांस नली में अटक गया था। डॉक्टर गले से चना निकाल पाते इससे पहले ही मासूम ने दम तोड़ दिया। घटना रतनपुर थाना क्षेत्र की है। पढ़ें पूरी खबर…

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