खरगोन जिले में सोयाबीन किसानों की फसल अल्पवर्षा और पीला मोजेक रोग के कारण खराब हो गई है। प्रति एकड़ 50 किलो से 1 क्विंटल तक ही उपज मिल रही है, जिससे किसान अब फसल की थ्रेसिंग नहीं करा रहे हैं। वे अपनी खराब फसल को रोटावेटर चलाकर या मवेशी चराकर नष्ट कर रहे हैं। किसानों ने भावांतर योजना में भी पंजीयन नहीं कराया है। उनका कहना है कि कटाई और थ्रेसिंग में प्रति एकड़ दो से तीन हजार रुपए का खर्च आ रहा है, जबकि नमी वाली सोयाबीन का बाजार भाव 4500 रुपए प्रति क्विंटल भी नहीं मिल रहा है। किसानों ने सरकार से भावांतर की बजाय सोयाबीन की एमएसपी पर खरीदी और प्रति एकड़ मुआवजा देने की मांग की है। झिरन्या के बंझर निवासी किसान आकाश गुर्जर ने बताया कि उन्होंने 6 एकड़ में सोयाबीन बोई थी, लेकिन थ्रेसिंग कराने पर दोनों खेतों से कुल एक क्विंटल का औसत उत्पादन मिला। किसान जमनालाल पंवार ने कहा कि थ्रेसिंग में प्रति एकड़ 2000 रुपए से अधिक का खर्च आ रहा है, ऐसे में कुछ भी नहीं बचेगा। भारतीय किसान संघ के प्रतिनिधि श्यामसिंह पवार ने बताया कि कम उपज के कारण किसान अपनी फसल को मवेशियों से चरा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले दो महीने से प्रशासन ने कोई सुध नहीं ली है। किसान अब अगली फसल की तैयारी के लिए रोटावेटर चला रहे हैं। पवार ने चेतावनी दी कि यदि शासन ने मुआवजा नहीं दिया तो किसान आंदोलन करेंगे। भीकनगांव क्षेत्र की कांग्रेस विधायक झूमा सोलंकी ने कहा कि दो महीने पहले पीला मोजेक से फसल खराब हुई थी, लेकिन अब सर्वे की बात सामने आ रही है। उन्होंने कहा कि पूरी फसल चारा बन गई है। विधायक सोलंकी ने कलेक्टर से चर्चा कर पीड़ित किसानों को मुआवजा दिलाने का प्रयास करने की बात कही। देखिए तस्वीरें…


