नरसिंहपुर जिले के गोटेगांव में बस हादसे में 4 साल की बच्ची की मौत के बाद फर्जी एनओसी पर रजिस्टर्ड बसों के खिलाफ कार्रवाई हुई है। रविवार को जिला परिवहन अधिकारी ने गोटेगांव में सर्चिंग अभियान चलाया, जिसमें अरुणाचल प्रदेश से जारी फर्जी एनओसी पर उज्जैन आरटीओ में रजिस्टर्ड तीन और बसें जब्त की गईं हैं। ये बसें बिना वैध दस्तावेजों के चलाई जा रही थीं। अधिकारी ने बताया कि गोटेगांव से संचालित होने वाली इन बसों की जांच के दौरान आरटीओ नंबर, चेचिस और इंजन नंबर में गड़बड़ी पाई गई। तीनों बसों को जब्त कर थाने में खड़ा करवा दिया गया है। जांच में इन बसों के संचालक संध्या नेमा, बागीश द्विवेदी और सतेंद्र पटेल बताए गए हैं। बागीश द्विवेदी को बालाजी ट्रैवल्स के संचालक साहिल सिंह राजपूत का पार्टनर बताया गया है। उसकी एक बस बिना नंबर प्लेट के दौड़ रही थी। बता दें कि 3 अक्टूबर को श्रीनगर गांव में बच्ची की मौत बालाजी ट्रैवल्स की बस (एमपी-13 जेडडब्ल्यू-4986) से ही हुई थी। पुलिस जांच में सामने आया था कि बस का रजिस्ट्रेशन 1 सितंबर को शासन द्वारा निरस्त कर दिया गया था। इस मामले में बस मालिक और भाजपा नेता साहिल सिंह राजपूत, चालक और परिचालक को पहले ही जेल भेजा जा चुका है। कैग की अगस्त माह की रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि अरुणाचल प्रदेश और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों से फर्जी एनओसी के माध्यम से सैकड़ों वाहन मध्यप्रदेश में पंजीकृत कराए गए हैं। 1 सितंबर को परिवहन मंत्रालय ने इन सभी वाहनों का रजिस्ट्रेशन निरस्त कर दिया था, जिसके बाद 150 से अधिक वाहन अचानक गायब हो गए थे। जिला परिवहन अधिकारी ने बताया कि जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष निगरानी बढ़ाई गई है। यह भी जांच की जा रही है कि और कहां-कहां इस तरह की अवैध बसें दौड़ रही हैं। जानकारी के अनुसार, प्रदेश में करीब साढ़े छह सौ से अधिक बसें फर्जी एनओसी पर पंजीकृत की गई थीं, जिनमें से 90 प्रतिशत उज्जैन आरटीओ कार्यालय से अवैध तरीके से दर्ज कराई गई थीं।


