बुरहानपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में रविवार शाम पथ संचलन निकाला गया। नेहरू स्टेडियम ग्राउंड से शुरू हुए इस संचलन में हजारों स्वयंसेवक अनुशासित तरीके से बैंड की धुन पर कदमताल करते हुए शामिल हुए। यह आयोजन हर साल विजयादशमी पर होता है, लेकिन इस बार संघ के शताब्दी वर्ष के कारण इसे विशेष रूप से आयोजित किया गया। इस वर्ष प्रत्येक परिवार से एक सदस्य को पथ संचलन में शामिल करने का निर्णय लिया गया था। शाम 4.30 बजे स्वयंसेवक नेहरू स्टेडियम ग्राउंड पर एकत्रित हुए। मंच पर मुख्य वक्ता सुनील बागुल (मालवा प्रांत के बौद्धिक प्रमुख), जिला सर संघचालक विजय पोद्दार, नगर सर संघचालक राजेंद्र सिंघाल और बच्चू महाराज उपस्थित थे। स्वदेशी को व्यवहार में लाना चाहिए
मुख्य वक्ता सुनील बागुल ने कहा कि आजादी के समय भी स्वदेशी का उपयोग किया गया था और अब इसे व्यवहार में लाना चाहिए। उन्होंने अनुशासन के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि शाखा से मिली पद्धति व्यक्ति को श्रेष्ठ नागरिक बनाती है। उन्होंने बताया कि संघ की स्थापना का उद्देश्य भारत को पुनः विश्व गुरु और वैभव संपन्न बनाना है। संघ के 100 वर्ष
बागुल ने बताया कि संघ को 100 साल पूरे हो गए हैं और बुरहानपुर में स्वयं संघ प्रमुख डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने शाखा प्रारंभ की थी। उन्होंने कहा कि इस बार का संचलन इसलिए विशेष है क्योंकि यह हर मंडल में निकलेगा। स्वयंसेवक घर-घर संपर्क करेंगे, पत्रक वितरित करेंगे, सामाजिक सद्भाव की बैठकें करेंगे और हिंदू सम्मेलन आयोजित करेंगे। इसके अलावा प्रमुख नागरिक जन गोष्ठी और युवा संगम प्रत्येक खंड, जिले और प्रांत में आयोजित होंगे, ताकि हिंदू समाज अपनी पहचान स्थापित कर सके। देखिए तस्वीरें…


