माइनिंग कान्क्लेव:आईएसएम धनबाद और छत्तीसगढ़ के बीच क्रिटिकल मिनरल के लिए एमओयू

रायपुर में रविवार को माइनिंग कान्क्लेव का आयोजन किया गया। इसमें क्रिटिकल मिनरल के लिए आईएसएम धनबाद और छत्तीसगढ़ शासन के बीच एमओयू हुआ। वहीं कोल इंडिया और खनिज विकास निगम के बीच भी समझौता ​हुआ। इस मौके पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने खनिज ऑनलाइन 2.0, डीएमएफ पोर्टल और रेत खदानों की नीलामी के लिए रिवर्स ऑक्शन पोर्टल का शुभारंभ किया। सीएम साय ने कहा कि इस साल डीएमएफ से 1,673 करोड़ रुपए का अंशदान मिला है, जिससे 9,362 विकास किए जाएंगे। यह राशि स्वास्थ्य, शिक्षा और पेयजल पर खर्च करेंगे। इसी तरह 2024-25 में राज्य को 14,195 करोड़ रुपए का रिकॉर्ड राजस्व प्राप्त हुआ है। छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है, जिसने लिथियम ब्लॉक की नीलामी की है। अब तक 60 खनिज ब्लॉकों की नीलामी पूरी हो चुकी है और पांच नए ब्लॉकों का टेंडर जारी किया गया है। साय ने इस दौरान खनिज ऑनलाइन 2.0, डीएमएफ पोर्टल तथा रेत खदानों की ऑनलाइन नीलामी के लिए रिवर्स ऑक्शन पोर्टल का शुभारंभ किया। प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना के तहत जिला खनिज न्यास नियम-2025 लागू किए गए हैं। डीएमएफ पोर्टल 2.0 से निगरानी और प्रबंधन की प्रक्रिया को सशक्त किया गया है। नई रेत नीति-2025 से पारदर्शिता बढ़ी है और जल्द ही 200 से अधिक रेत खदानों की ई-नीलामी की जाएगी। क्लीन एनर्जी के क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के लिए आईआईटी रुड़की और आईएसएम धनबाद के साथ भी एमओयू साइन किए गए हैं। खनिज विकास निगम के अध्यक्ष सौरभ सिंह ने कहा कि खनन से राजस्व और रोजगार दोनों बढ़े हैं। राज्य में अब टिन से निकलने वाले स्लज से दो नए तत्वों का उत्पादन शुरू हुआ है। प्रदेश में 28 प्रकार के खनिजों का खनन होता है, जिनमें टिन, बॉक्साइट, कोयला, लाइमस्टोन और आयरन ओर प्रमुख हैं। गौण खनिज खदानों को दिए स्टार अवॉर्ड
मुख्य खनिजों की तर्ज पर राज्य में गौण खनिज खदानों में भी स्टार रेटिंग दिए गए। पर्यावरण प्रबंधन, प्रदूषण नियंत्रण और सुरक्षा मानकों का पालन कर बेहतर कार्य करने वाली 43 खदानों को स्टार अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। साय ने खदान संचालकों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया और उन्हें इस उपलब्धि के लिए बधाई दी। इनमें 3 खदानों को 5 स्टार, 32 खदानों को 4 स्टार और 8 खदानों को 3 स्टार अवॉर्ड दिए गए हैं। नई रेत नीति: अब नदियों से दो मीटर तक रेत निकाल सकेंगे, अवैध खनन पर होगी सख्ती कौशल स्वर्णबेर की रिपोर्ट रेत खनन और बिक्री की व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए नई रेत नीति 2025 लागू की गई है। इसके तहत अब रेत खदानों का आवंटन ऑनलाइन प्रक्रिया यानी ई-नीलामी से किया जाएगा। इससे भ्रष्टाचार और मनमानी पर रोक लगेगी तथा सरकार को अधिक राजस्व मिलेगा। दरअसल पहले नदियों से रेत निकालने की अनुमति 1 मीटर तक थी। अब इसे बढ़ाकर 2 मीटर तक करने का प्रस्ताव है, जिससे वैध खनन आसान होगा और अवैध खनन पर अंकुश लगेगा। इसके लिए राज्य सरकार ने तीन नई पर्यावरण समिति बनाई हैं, ताकि रेत खदानों की स्वीकृति जल्द दी जा सके और परियोजनाएं लटकें नहीं। खदानों की नीलामी में छत्तीसगढ़ के निवासियों और स्थानीय कंपनियों को प्राथमिकता मिलेगी। इससे रोजगार और स्थानीय भागीदारी को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही अवैध उत्खनन और परिवहन पर सख्त नियम बनाए गए हैं। पकड़े जाने पर अब भारी जुर्माना और कार्रवाई का प्रावधान है। रेत खनन से मिलने वाला 70 प्रतिशत धन जिला खनिज न्यास -डीएमएफ के तहत शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और पर्यावरण जैसे क्षेत्रों में खर्च किया जाएगा। वर्तमान में 119 रेत खदानें पर्यावरण स्वीकृति के साथ संचालित हैं जबकि लगभग 94 खदानों की स्वीकृतियां अंतिम चरण में हैं। लक्ष्य है कि अगले 12–18 महीनों में 300 से अधिक खदानें चालू हों। रेत से मिलने वाले राजस्व का 70% हिस्सा अब ग्रामीण विकास, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण के कामों में खर्च किया जाएगा। इससे ग्रामीण अंचलों में बुनियादी सुविधाओं में सुधार की उम्मीद है।

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