प्रदेश में पहली बार सरकारी स्कूलों और वहां पढ़ने वाले बच्चों का नए और अनोखे फार्मूले से टेस्ट लिया जाएगा। राज्य शैक्षणिक अनुसंधान केंद्र के विशेषज्ञों ने टेस्ट के लिए सवाल तैयार किए हैं। बच्चे के सवाल उनकी कक्षाओं के हिसाब से और टीचरों के सवाल भी उन कक्षाओं अनुसार तैयार किए गए हैं जिनमें वे पढ़ा रहे हैं। ज्यादातर सवाल सामान्य ज्ञान और उनके पढ़ने लिखने की क्षमता को परखने से संबंधित हैं। टेस्ट लेने वाली टीम कक्षा में बच्चों से किताब पढ़ाकर देखेगी कि वे पढ़ सकते हैं या नहीं? बोर्ड में लिखवाकर देखेगी कि उन्हें लिखना आता है या नहीं? स्कूल के टीचरों के आने जाने की टाइमिंग का रिकार्ड चेक किया जाएगा। टीचरों और बच्चों के परफार्मेंस के आधार पर तय होगा कौन सा स्कूल और कहां के बच्चे बेस्ट, कहां के फिसड्डी। फिर उन्हें ए, बी, सी और डी ग्रेडिंग दी जाएगी। पढ़ाई और पढ़ाने के स्तर को जांचने के लिए चार अलग-अलग टूल बनाए गए हैं। पहली से पांचवीं कक्षा के बच्चों व स्कूलों को एक टूल रखा गया है। जबकि कक्षा छठवीं से आठवीं को दूसरे, कक्षा नवमीं व दसवीं को तीसरे और ग्यारहवीं व बारहवीं कक्षा को चौथे टूल में रखा गया है। जांच के दौरान स्कूल की स्थिति भी जांची जाएगी। स्कूल में बैठने और पढ़ाने की बेहतर व्यवस्था है या नहीं। बच्चों के लिए पीने के पानी और वॉशरूम बेहतर है या नहीं, ये भी चेक किया जाएगा। 48 हजार से ज्यादा स्कूलों में विशेषज्ञों की टीम लेगी शिक्षकों का टेस्ट राज्य की सरकारी स्कूलों में मुख्यमंत्री गुणवत्ता अभियान का पहला चरण आज से शुरू होगा। स्कूल शिक्षा विभाग ने इसके लिए गाइड लाइन तय कर दी है। इसके तहत प्रदेश की 48 हजार प्राथमिक शाला, पूर्व माध्यमिक, हाई और हायर सेकेंडरी स्कूल के बच्चों और शिक्षकों का टेस्ट लिया जाएगा। ये टेस्ट लेने के लिए विशेषज्ञों के साथ स्कूल के आस-पास रहने वाले वरिष्ठजनों की टीम बनाई गई है। इस टीम में एक दूसरे स्कूल के विशेषज्ञ शिक्षक रहेंगे। ये भी तय कर लिया गया है कि किस स्कूल के टीचर कौन-कौन से स्कूलों में टेस्ट लेने वाली टीम में शामिल रहेंगे। पहले चरण में 6 से 8 अक्टूबर के बीच टीम अपनी सहूलियत के अनुसार स्कूल पहुंचकर टेस्ट लेगी। अभियान के दौरान जिन स्कूलों में खामी मिलेगी उसे दूर करने के लिए जनवरी तक टाइम दिया जाएगा। जनवरी के अंतिम या फरवरी के पहले सप्ताह में अफसरों की टीम दोबारा टेस्ट लेने पहुंचेगी। आगे क्या सी-डी केटेगरी के स्कूल क्यों पीछे ? होगी जांच योजना के तहत टेस्ट लिए जाने के बाद जहां के बच्चे पढ़ाई में मापदंडों के अनुसार पिछड़ जाएंगे उन स्कूलों को सी और डी केटेगरी में रखा जाएगा। उसके बाद ये परीक्षण किया जाएगा कि उन स्कूलों में बच्चों के पिछड़ने का कारण क्या है। वहां कौन सी परिस्थिति ऐसी है जिनकी वजह से बच्चे अन्य स्कूलों की तुलना में पिछड़े हुए हैं? ये देखा जाएगा कि क्या बच्चे स्कूल नहीं आते या टीचर पढ़ाने में लापरवाही बरत रहे हैं। ऐसे सभी कारणों का पता लगाकर उन्हें दूर करने के प्रयास किए जाएंगे। उन कारणों का दूर करने के बाद अगले सत्र में फिर उन्हीं स्कूलों का टेस्ट लिया जाएगा। इस दौरान ये देखा जाएगा कि बच्चों की पढ़ाई का स्तर सुधरा या नहीं।


