ऐतिहासिक हरे-भरे पेड़ सिर्फ पर्यावरण ही संरक्षित नहीं करते, ये हमारी विरासत हैं, हमारी संस्कृति हैं। इनसे हमारी पहचान है। इन्हें सहेजना, इन्हें बचाना, हमारा कर्तव्य है। लालबाग स्थित गुरुनानक कॉलोनी की बारामत्था बगीची परिसर में स्थित 300 साल पुराने पीपल के पेड़ को संरक्षित करने के लिए रविवार को जुटे पर्यावरणप्रेमियों ने कहा, पेड़ों को संरक्षित नहीं किया तो जीना मुश्किल हो जाएगा। पेड़ों से ही हवा है, पेड़ों से ही पानी है। पर्यावरणप्रेमियों ने पेड़ बचाने के लिए प्रार्थना सभा व दीपदान किया। कुछ नागरिकों ने मुंडन भी कराया। कलेक्टर, निगम कमिश्नर को इससे अवगत कराया। उधर, परिसर में ही तीन से चार पेड़ों के और कटे होने की जानकारी पता चली तो लोगों ने नगर निगम अफसरों से शिकायत की। तब निगम ने पंचनामा बनाया। जितने भी ऐतिहासिक पेड़, सभी को संरक्षित किया जाए रविवार सुबह 11 बजे कई पर्यावरण रक्षक, सामाजिक कार्यकर्ता, जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। सभी ने प्रशासन व निगम से पेड़ को संरक्षित करने का आग्रह किया। सभी का कहना था, यह संवेदनशील मामला है। इसे धरोहर पेड़ घोषित किया जाए। इस तरह के जितने पेड़ शहर में हैं, उनको भी सुरक्षित करें। उन्होंने कहा, यह पीपल वृक्ष पेड़ नहीं, बल्कि इंदौर की सांस्कृतिक और हरित धरोहर का प्रतीक था, जिसे होलकरकालीन विरासत के रूप में संरक्षित किया जाना चाहिए था।


