नवंबर में होगा स्पेशल ओलिंपिक का आयोजन:सच में खास हैं ‘स्पेशल ओलिंपिक भारत’ में चुने गए कोटा के बच्चे

विनम्र मैदान पर तभी एक्टिव होंगे, जब उन्हें जूस पिलाने का वादा किया जाए…लवेश की जिद कि पापा साथ दौड़ें… कृष्णा का पता ही नहीं लगता कि वे देख कहां रहे हैं और बात किससे कर रहे हैं… राजस्थान के कोटा शहर के सीवी गार्डन में 3 स्पेशल लड़के और 2 लड़कियां स्पेशल ओलिंपिक के फुटसल और फुटबॉल की प्रैक्टिस कर रहे हैं। ये स्पेशल बच्चे और स्पेशल इसलिए हो गए हैं कि नवंबर में कोलकाता में होने वाले स्पेशल ओलिंपिक के लिए वे चुने गए हैं। ऐसे में यहां का नजारा भी आमिर खान की फिल्म ‘सितारे जमीन पर’ जैसा हो गया है। अकेले बच्चे ही मेहनत नहीं कर रहे, बल्कि इनके पैरेंट्स और कोच भी सुबह दाे से तीन घंटे इनके साथ ही ट्रेनिंग कर रहे हैं। उतनी ही मेहनत कर रहे हैं। समाज: लोग इनसे बात करें, सहज रहें तो ये स्पेशल बच्चे भी सामाजिक हो जाते हैं
एडीएचडी और ऑटिज्म के शिकार लवेश के साथ पिता सुरेंद्र आते हैं। साथ दौड़ते हैं। कहते हैं लोग इनसे बात करें तो यह भी सामाजिक हो सकते हैं। कृष्णा के साथ उनकी मां अर्चना हिरूड़कर व चाचा प्रशांत आते हैं। श्रुति भार्गव (36) और साबरमती कॉलोनी की टिया (17) भी प्रैक्टिस में जुटी है। श्रुति के साथ मां रचना, टिया के साथ मां ज्योति आती हैं। वे चाहती हैं कि वे खेल में आगे बढ़ें। काबिलियत कम नहीं… कोच बोले, धैर्य और संयम की जरूरत इन बच्चों को ओलिंपिक के लिए तैयार कर रहे कोच राज चौहान कहते हैं- इनमें काबिलियत की कमी नहीं है, लेकिन इन्हें तैयार करने में थोड़ा धैर्य और संयम चाहिए होता है। जैसे-किसी बच्चे ने जिद कर ली कि बॉल नहीं रोकेगा तो फिर नहीं रोकेगा। उसे प्यार से समझाना होता है।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *