राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के सदस्य कानूनगो ने लिखा-:ये कैसी एमपी पुलिस! ASI कहता है बिना पूर्व सूचना के थाने नहीं आ सकते

राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने सोशल मीडिया पर लिखते हुए डीजीपी से पूछा है कि क्या पुलिस थाने का निरीक्षण करने के लिए आज्ञा लेनी होगी, आपके थाने का एसआई कह रहा है कि बिना पूर्व सूचना के आप थाने नहीं आ सकते है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य ने यह भी लिखा कि आपके थाने का स्टाफ ने सहयोग नहीं किया है। उन्होंने लिखा कि अब डीजीपी से हम पूछेंगे कि हमको निरीक्षण के लिए किसकी आज्ञा लेनी होगी। प्रियंक कानूनगो के एक्स पर जबलपुर पुलिस ने संज्ञान लिया है। एएसपी ने कहा कि निश्चित रूप से थाने में घटना हुई है, वो गलत है। आगे की कार्रवाई के लिए एसपी को प्रतिवेदन भेजा गया है, दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। दरअसल, मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो इन दिनों मध्यप्रदेश के दौरे पर हैं। रविवार की रात को जबलपुर से भोपाल जाते समय अचानक ही वो शहपुरा थाने पहुंचे। उन्होंने पहले तो टीआई के विषय में पूछा। थाने में 2 कुछ पुलिसकर्मी थे। कानूनगो ने हवालात में बंदियों की गणना का रिकार्ड पूछा तो उन्होंने एसआई को काल कर थाने बुलाया। कुछ ही देर बाद थाने में पदस्थ एसआई महेंद्र जाटव पहुंचे तो उन्होंने जांच में सहयोग करने से इनकार कर दिया। मानवाधिकार आयोग ने जब एसआई से बात की तो उनका कहना था कि बिना पूर्व सूचना के आप थाने में नहीं आ सकते हैं। कानूनगो ने पोस्ट पर लिखा- मैं मध्यप्रदेश प्रवास के दौरान जबलपुर जिले के शहपुरा थाने में हवालात इत्यादि के निरीक्षण के लिए आया हूं। यहां पुलिस स्टाफ मौजूद नहीं है। केवल 2 पुलिस कॉन्स्टेबल मिले हैं ।कोई स्टाफ की या हवालात में बंदियों की गणना रिकॉर्ड नहीं मिला है। रिकॉर्ड मांगने के बाद यहां के महेंद्र जाटव नामक एक सब इंस्पेक्टर ने निरीक्षण में सहयोग करने से इंकार कर दिया। एएसपी सूर्यकांत शर्मा ने कहा कि मानव अधिकार आयोग के सदस्य रविवार की रात को शहपुरा थाने पहुंचे थे। फोन पर उनसे बात की तो उन्होंने बताया कि थाने में स्टाफ ने उनके साथ सही बर्ताव नहीं किया है। इसका एक प्रतिवेदन एसपी को दिया गया है। इसमें संबंधित कर्मचारी जिन्होंने गलत किया है, उनके खिलाफ एक्शन लिया जा रहा है। जल्द ही विभागीय कार्रवाई की जाएगी। अगर पहचान से संबंधित कोई बात आ रही है, तो भी गलत है, क्योंकि थाने में पदस्थ पुलिसकर्मियों को व्यवहार सभी से अच्छा होना चाहिए। शहपुरा थाने में पदस्थ एसआई महेंद्र जाटव का कहना है कि रविवार रात को जब मानव अधिकार आयोग के सदस्य थाने आए थे, तब प्राइवेट गाड़ी में थे। कुर्ता-पैजामा पहनकर दो साथी और गनमैन के साथ अचानक ही थाने गए, जिससे उन्हें पहचान नहीं पाया। टीआई सर से भी फोन पर बात करवाई थी लेकिन उन्होंने बात नहीं की। पहले से न कोई जानकारी थी और न ही कंट्रोल रूम से काल आया था। थाने में ऐसा कोई केस भी लंबित नहीं है, जिसकी उन्हें जांच करना था। हम और स्टाफ कुछ समझ पाते, उससे पहले ही वह थाने के बाहर आए और गाड़ी में बैठकर चले गए।

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