हरदा जिले में किसानों को खाद के लिए तीन महीने से लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है। वितरण व्यवस्था में खामियों के कारण किसानों को केवल दस बोरी यूरिया के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है और कई बार खाली हाथ लौटना पड़ता है। सोमवार को जिले में लगभग 1400 मीट्रिक टन यूरिया वितरित किया गया। यह यूरिया 9 सहकारी समितियों, 10 निजी डीलरों के साथ-साथ डीएमओ और एमपी एग्रो के गोदामों से वितरित किया गया। खाद लेने के लिए पुरुषों के साथ-साथ महिला किसान भी कतारों में खड़ी दिखीं। सहायक संचालक कृषि डॉ. भागवत सिंह मंडलोई ने बताया कि आगामी रबी सीजन के लिए कृषि विभाग ने शासन को 46 हजार मीट्रिक टन यूरिया और 23 हजार मीट्रिक टन डीएपी की मांग भेजी है। उन्होंने आश्वस्त किया कि जिले के किसानों को उनकी जरूरत के मुताबिक पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराया जाएगा और जिले में खाद की कोई कमी नहीं है। हालांकि, किसानों का कहना है कि उन्हें जितनी खाद चाहिए, उतनी नहीं मिल रही है। उन्हें एक ऋण पुस्तिका पर केवल दस बोरी यूरिया दी जा रही है, जबकि उनकी आवश्यकता अधिक है। किसानों ने यह भी बताया कि उन्हें अब रबी सीजन की फसल से ही उम्मीद है, जिसके लिए वे खाद लेने पहुंचे हैं। उनका आरोप है कि गोदामों में डीएपी का स्टॉक होने के बावजूद केवल यूरिया दी जा रही है। गौरतलब है कि आगामी रबी सीजन में जिले में लगभग 45 हजार हेक्टेयर में चना, 40 हजार हेक्टेयर में मक्का और 1 लाख 10 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की बुवाई प्रस्तावित है।


