इंदौर में NSUI ने किया प्रदर्शन:डीएवीवी रैगिंग और Gen-Z प्रोटेस्ट को लेकर हो रही साजिश पर किया विरोध-प्रदर्शन

इंदौर एनएसयूआई ने सोमवार को देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी के IET इंजीनियरिंग कॉलेज में व्याप्त अव्यवस्थाओं, रैगिंग की बढ़ती घटनाओं तथा हाल ही में सामने आए Gen-Z प्रोटेस्ट को लेकर हो रही साजिशों के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया और DAVV प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान NSUI जिला अध्यक्ष रजत सिंह पटेल ने कहा कि DAVV को रैगिंग मुक्त और छात्र हितैषी संस्थान बनाना हमारी प्राथमिकता है। यदि प्रशासन जल्द कार्रवाई नहीं करता, तो NSUI उग्र आंदोलन करेगी। NSUI ने आरोप लगाया है कि IET डीएवीवी में चीफ वार्डन और कुछ अधिकारी संस्थान को शिक्षा के मंदिर की बजाय राजनीति का अखाड़ा बना रहे हैं, जिसके कारण छात्रों में भय और असंतोष का माहौल बना हुआ है। संगठन ने मांग की कि दोषी अधिकारियों एवं वार्डन को तत्काल हटाया जाए। रैगिंग में शामिल तत्वों और Gen-Z प्रोटेस्ट में शामिल दोषियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए। एनएसयूआई के इस आंदोलन में कांग्रेस के नेता भी शामिल हुए थे। कांग्रेस का कहना है कि देवी अहिल्या विश्वविद्यालय में एबीवीपी के छात्र नेताओं द्वारा नेपाल की तर्ज पर Gen-Z की तरह आंदोलन करने के लिए प्रथम वर्ष के छात्रों को उकसाया गया। फर्जी ट्विटर एकाउंट बनवाए गए। विश्व विश्वविद्यालय की एंटी रैगिंग कमेटी द्वारा की गई जांच में साफ शब्दों में लिखा है कि Gen-Z जैसा आंदोलन करने वाले कौन-कौन छात्र हैं और किस संगठन से जुड़े हैं, लेकिन कुलगुरु द्वारा छात्रों को बचाने के लिए पूरा जोर लगा दिया और केवल 4 छात्रों पर कार्रवाई की गई। कुलगुरु से कांग्रेस नेताओं की तीखी बहस हुई। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि आप कल चले जाएंगे कही से भाजपा से चुनाव लड़ लेंगे मगर इस तरह से विश्वविद्यालय का नाम आप बदनाम न करें। आप भाजपा के कुलगुरु नहीं हैं। आप लाखों छात्रों के अभिभावक हैं। तत्काल दोषी छात्रों पर कार्रवाई सुनिश्चित करें अन्यथा कांग्रेस द्वारा उग्र आंदोलन किया जाएगा। कमेटी ने किया था खुलासा इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी में नेपाल की तर्ज पर GenZ प्रोटेस्ट की तैयारी थी। ये खुलासा यूनिवर्सिटी की एंटी रैगिंग कमेटी ने किया था। कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार, सीनियर स्टूडेंट ने फर्स्ट ईयर के विद्यार्थियों पर आंदोलन की तैयारी का दबाव बनाया था। सीनियर्स ने फर्स्ट ईयर स्टूडेंट्स को फर्जी ईमेल आईडी और ट्विटर अकाउंट बनाने, सोशल मीडिया पर सीनियर्स के संदेश रीट्वीट करने और विशेष हैशटैग वायरल करने के लिए कहा था। विरोध करने पर उन्हें बैच आउट करने की धमकी भी दी थी। I

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